पैसा होने के बाद भी नहीं हुआ काम

गगरेट—महात्मा गांधी के सपनों के भारत के जनप्रतिनिधियों व सरकारी अमले को शिथिलता की ऐसी काई लगी कि विकास योजनाएं धरातल पर आने से पहले ही फिसलने लगी हैं। विकास योजनाओं के लिए पैसा भी है लेकिन इन्हें मूर्तरूप कौन पहनाए। विकास खंड गगरेट के अंतर्गत आने वाली कई ग्राम पंचायतों में पिछली सरकार के समय की योजनाओं का बजट भी जस का तस पड़ा है ,लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। इसका विधायक राजेश ठाकुर ने कड़ा संज्ञान लिया है और बुधवार को विकास खंड गगरेट के अंतर्गत आने वाले पंचायत प्रधानों, पंचायत सचिवों, तकनीकी सहायकों व कनिष्ठ अभियंताओं की संयुक्त समीक्षा बैठक में विकास कार्यों को अमलीजामा पहनाने में लापरवाही बरतने पर खासी नाराजगी व्यक्त की। समीक्षा बैठक में कई हैरानीजनक तथ्य उभर कर सामने आए। ग्राम पंचायत अंबोटा में पूर्व सरकार के समय इनडोर स्टेडियम के लिए मंजूर बजट के बावजूद आज दिन तक इनडोर स्टेडियम बनकर तैयार नहीं हो पाया है। कारण यह बताया गया कि इसका निर्माण ठेकेदार की मार्फत करवाया जा रहा है और ठेकेदार पैसे लेने के बावजूद काम नहीं कर रहा है। 158 कार्य प्रगति पर हैं जबकि 148 विकास कार्यों पर बजट स्वीकृत होने के बावजूद एक ईंट तक नहीं लग सकी है। विधायक राजेश ठाकुर ने कहा कि जिन ग्राम पंचायतों में विवाद के कारण विकास कार्यों का बजट अटका हुआ है वह बजट खंड विकास कार्यालय को वापस किया जाए ताकि खंड विकास कार्यालय की मार्फत यह इस पैसे का सदुपयोग हो सके।  इस अवसर पर पंचायत समिति की चेयरपर्सन सुमन भट्टी, जिला परिषद सदस्य रमेश हीर भी मौजूद थे। ग्राम पंचायत लोअर भंजाल की प्रधान ने बताया कि जिस तकनीकी सहायक ही उनकी ग्राम पंचायत में ड्यूटी लगी है वह उस पंचायत में अब तक आया ही नहीं है। इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसका खंड विकास अधिकारी ने कड़ा संज्ञान लिया और तकनीकी सहायक को हिदायत दी कि अगर नौकरी करनी है तो तत्काल प्रभाव से ग्राम पंचायत कार्यालय में रिपोर्ट करें।

You might also like