प्रकृति को बचाना होगा

– राजेश कुमार चौहान

पिछले कुछ दिनों से उत्तर भारत के बहुत से राज्य भीषण गर्मी की चपेट हैं। भौतिकतावाद और आधुनिकता की अंधी दौड़ में इनसान ने पर्यावरण को बेहद खराब कर दिया है।  पर्यावरण को लेकर पूरी दुनिया चिंतित है। पर्यावरण को दूषित करना मतलब मानव जाति अपने भविष्य के रास्ते पर खूब कांटे बिखेर रही है। सड़कों के विस्तार के लिए धड़ाधड़ पेडों पर सरकार कुल्हाड़ी तो चला रही है, लेकिन सड़क को चौड़ा करने के बाद उसके दोनों ओर वृक्ष लगाने के लिए सरकारें गंभीर नहीं हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए अब भी गंभीरता नहीं दिखाई गई, तो वह दिन दूर नहीं है, जब स्वर्ग जैसी धरती इनसान के लिए नरक बन जाएगी।

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