प्रचंड गर्मी के साथ जंगल दहके

प्रदेश में अब तक 330 मामले, लाखों की वन संपदा राख

शिमला – प्रदेश में प्रचंड गर्मी के साथ ही जंगलों में आग की घटनाएं भी दिनों-दिन बढ़ ही रही हैं। इससे बेशकीमती जंगलों की वन संपदा तो खाक हो ही रही है। हालांकि वन विभाग ने फायर सीजन से पहले ही अपने कर्मचारियों को सक्रिय करने सहित आग पर काबू पाने के लिए रैपिड फायर फोर्स का भी गठन किया है, लेकिन आग की घटनाओं को रोकने में विभाग के सभी प्रयास बौने साबित हो रहे हैं। परिणाम स्वरूप प्रदेश के जंगल धू-धू कर जल रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में वन भूमि पर लग  रही आग को लेकर बिलासपुर स्थित वन संरक्षण एवं आग नियंत्रण प्रभाग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इसके मुताबिक प्रदेश में अभी तक भिन्न-भिन्न स्थानों पर जंगलों में आग की 330 घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें 17 सौ हेक्टेयर भू-भाग पर आग के कारण 32 लाख रुपए के नुकसान का आकलन किया गया है। इसके तहत प्रदेश भर में 843.6 हेक्टेयर क्षेत्र में विषम जंगली क्षेत्र, 283.60 हेक्टेयर क्षेत्र में वन विभाग का पौधरोपण और 535.63 हेक्टेयर भू-भाग अन्य वन क्षेत्र का जल चुका है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश में आग की सबसे अधिक घटनाएं मंडी वन मंडल के तहत हुई हैं, जहां अब तक 70 बार आग लग चुकी है और इससे 290.83 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ, जिसमें साढ़े छह लाख से अधिक के नुकसान का आकलन किया गया। इसके बाद धर्मशाला वन मंडल के तहत आग की 60 घटनाओं हुईं, जबकि नाहन मंडल के तहत 43 घटनाओं में 260.13 हेक्टेयर क्षेत्र जला। इसी तरह बिलासपुर में 33, हमीरपुर में 31, रामपुर में 32, सोलन में 28, चंबा में 11, शिमला में नौ और धर्मशाला व शिमला वाइल्ड लाइफ क्षेत्र में भी आग लगने की तीन-तीन घटनाएं हो चुकी हैं। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो जंगलों में आग की अधिकतर घटनाएं दुर्गम वन क्षेत्रों में लग रही हैं, जहां तक अग्निशमन टीमों का जाना संभव नहीं हो पाता। इसके अलावा अधिकतर वन क्षेत्र सड़कों से काफी दूर हैं और आग एकदम से बड़े भू-भाग में फैल रही है, जिसे चाहकर भी वनकर्मी व रैपिड फायर फोर्स के सदस्य बुझा नहीं पा रहे हैं।

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