प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों के आगे झुकी कंपनी

कुल्लू—आखिर एनएचपीसी और गैमन कंपनी नीणू नाला- शिलागढ़ सड़क की खस्ताहाल मामले पर ग्रामीणों आगे प्रदर्शन करने के बाद झुक गई। कंपनी पिछले कई सालों से ग्रामीणों की मांग को अनदेखी करती जा रही थी। लेकिन सोमवार को पारली पंचायत के लोगों ने ठेला बस स्टाप पर एकजुट कर सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया तो, कंपनी को प्रदर्शन के पांच घंटे बाद बात स्वीकार करनी पड़ी। सोमवार यानी 24 जून को ‘दिव्य हिमाचल’ ने पारली पंचायत के लोगों की इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बता दें कि सोमवार सुबह, पारली, मनिहार, उड्सू, नजां, ज्येष्ठा, रोगणा, खारना और ठेला के  करीब 150 के करीब ग्रामीणों ने महिलाओं के साथ ठेला बस स्टाप पर ठीक साढ़े छह बजे से अपनी हक की लड़ाई के लिए प्रदर्शन शुरू कर दिया था। हालांकि ग्रामीणों ने बसें अन्य छोटे वाहनों को सड़क पर चलने दिया, लेकिन कंपनी की गाडि़यों को ठेला से आगे नहीं छोड़ा गया। करीब साढे़ 11 बजे एनएचपीसी और गैमन कंपनी के अधिकारी पहुंचे और ग्रामीणों ने अधिकारियों को घेरा। इसके बाद कंपनी के अधिकारियों ने लोगों को लिखित आश्वासन दिया कि डेढ़ महीने के भीतर वर्कशाप से लेकर राउली तक करीब तीन किलोमीटर सड़क को चकाचकर कर दिया जाएगा। वहीं, शिलागढ़ तक की सड़क के लिए आगामी जून तक का समय कंपनी ने मांगा है। कंपनी ने आश्वासन दिया है कि शिलागढ़ तक सड़क को सुरक्षा की दृष्टि के साथ-साथ बाकायदा टायरिंग कर चकाचक कर दिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन बंद किया और कंपनी की गाडि़यों को छोड़ दिया गया। पारली पंचायत के प्रधान किशन चंद, वन सुधार कमेटी के अध्यक्ष गौतम चंद, युवक मंडल प्रधान सुनील ठाकुर, राकेश कुमार का कहना है कि ग्राम पंचायत पारली व ज्येष्ठा सड़क की टायरिंग उखड़ने से नीणू नाला से मनीहार तक काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उधर, ग्राम पंचायत पारली के प्रधान किशन चंद ठाकुर ने कहा कि सोमवार को ठेला में ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कंपनी की गाडि़यों को आगे नहीं जाने दिया। इसके बाद कंपनी के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर बात को मानकर सड़क को सुधारने का आश्वासन दिया है। उसके बाद प्रदर्शन ग्रामीणों ने बंद कर दिया। अगर कंपनी ने झूठे आश्वासन  ही दिए तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने से भी गुरेज नहीं करेंगे।

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