प्रदेश में लक्ष्य से कोसों दूर सोलर पावर

दिसंबर तक आठ मेगावाट का टारगेट, अभी पहुंचे 3858 किलोवॉट तक

शिमला – केंद्र व राज्य सरकार के माध्यम से दो तरफा सबसिडी देने के बावजूद हिमाचल में लोग सोलर पावर की ओर रुझान नहीं दिखा रहे हैं। केंद्र सरकार के नव एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने राज्य सरकार को इस साल के अंत में दिसंबर तक ग्रिड से जुड़े सोलर पावर प्लांट से आठ मेगावाट तक का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है, परंतु अभी तक यहां 3858 किलोवॉट क्षमता तक का ही दोहन हो पाया है। ऐसे में प्रदेश सरकार की ऊर्जा एजेंसी हिम ऊर्जा ने प्रदेश के लोगों से अपील की है कि वे सोलर पावर से जुड़कर सबसिडी का लाभ उठाएं। बता दें कि यहां पर सोलर पावर के दोहन के लिए ग्रिड से जुड़े पावर प्लांट स्थापित करने को जहां सबसिडी मिल रही है वहीं इस्तेमाल के बाद जो बिजली बचेगी उसे राज्य बिजली बोर्ड खरीदेगा भी। ऐसे में लोगों को सोलर पावर तैयार करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए, परंतु लोग इस दिशा में नहीं सोच रहे हैं। बता दें कि सोलर रूफ टॉप प्लांट घर की छत पर लग सकते हैं, जिसे ग्रिड से जोड़ा जाता है। इन संयंत्रों को लगाने के लिए कुल लागत 53,150 रुपए प्रति किलोवाट आती है। नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा 70 प्रतिशत सबसिडी दी जाती है, जबकि राज्य सरकार द्वारा भी 4,000 रुपए प्रति किलोवाट हिम ऊर्जा के माध्यम से सबसिडी दी जा रही है। उपभोक्ता को पहले 30 प्रतिशत राशि जो 15,945 रुपए प्रति किलोवाट बनती है, जमा करनी होगी, वहीं टू-वे मीटर की  लागत भी उपभोक्ता को ही वहन करनी होगी। राज्य सरकार की सबसिडी उपभोक्ता के बैंक खाते में जमा होगी।

आगे आए जनता

हिम ऊर्जा की सीईओ क्त्रृतिका कुलहर के अनुसार इच्छुक उपभोक्ता शीघ्र अपना आवेदन अपने जिला परियोजना अधिकारी हिमऊर्जा को कर सकते हैं या हिम ऊर्जा के ऑनलाइन पोर्टल वेबसाइट पर भी आवेदन कर सकते हैं। बिजली बोर्ड अतिरिक्त उत्पादित ऊर्जा को राज्य नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दर पर खरीदेगा। इसलिए लोगों को उसकी टेंशन भी नहीं है। ऐसे में लोगों को सोलर पावर से जुड़ने के लिए आगे आना चाहिए।

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