बचत करें या निवेश

बचत की आदत अकसर हमें परिवार से विरासत के रूप में मिलती है और इसका महत्त्व भी हमें सबसे अधिक अपने माता-पिता द्वारा ही समझाया जाता है। यह शिक्षा तब अधूरी ही साबित होती है, जब हम नौकरी अथवा अपना व्यवसाय आरंभ करते हैं, किंतु बचत, निवेश अथवा वित्तीय नियोजन के बारे में अनभिज्ञ ही रहते हैं। यह एक तथ्य है कि बचत एक ठोस और सुरक्षित भविष्य की दिशा में पहला कदम है, किंतु केवल बचत से आप दीर्घ कालिक लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सकते। अमूमन बचत और निवेश को एक ही परिप्रेक्ष्य में देखा जाता है, किंतु दोनों भिन्न हैं, इनका उद्देश्य अलग है तथा आपकी वित्तीय रणनीति में दोनों अलग भूमिका निभाते हैं। आईए बचत और निवेश के तथ्यों को विस्तारपूर्वक समझते हैं…

लेखक : करुणेश देव

देव की वित्तीय दवा

 करुणेश देव बैंकिंग प्रोफेशनल रहने के साथ ही कुछ बड़े विदेशी बैंकों व इंश्योरेंस कंपनियों संग काम कर चुके हैं

 वर्तमान में पर्सनल फाइनांस और प्लानिंग में लेखन व शिक्षण

बचत

जब हम हर महीने या नियमित रूप से अपनी आय में से थोड़ा पैसा अलग रखते हैं, उसे बचत करना कहते हैं। इस पैसे को हम छोटी अवधि के लिए तथा बहुत ही सुरक्षित विकल्पों में लगाते हैं, जिससे यह हमें आसानी से, जब चाहे तब उपलब्ध हो जाए। छोटी अवधि की परिभाषा संदर्भ के अनुसार बदलती रहती है, यह एक महीना, छह महीने, एक साल या उससे अधिक भी हो सकती है।

निवेश

जब लक्ष्य कुछ साल दूर हो तब आप अपनी बचत वाला धन अधिक जोखिम उठाकर ऊंची दर या रिटर्न वाले विकल्पों में लगाते हैं। उदाहरण के लिए बच्चों की उच्च शिक्षा या स्वयं की सेवानिवृत्ति, जबकि ये दोनों ही लक्ष्य बहुत साल दूर हैं। इस प्रकार दीर्घावधि में धन सृजन वाले विकल्प को निवेश कहते हैं। यहां ध्यान देने वाली दो बातें हैं, जो हैं लंबी अवधि एवं अधिक जोखिम व बचत वाले धन की तरह निवेश वाला धन आसानी से आपको उपलब्ध नहीं हो सकता।

महत्त्वपूर्ण तथ्य

1 बचत से मिलने वाली रिटर्न या आय न्यूनतम रहती है, लेकिन वस्तुतः जोखिम भी लगभग न के बराबर रहता है। अधिकतर लोग बचत के तौर पर बैंक सेविंग्स, आवर्ती जमा (आरडी) या सावधि जमा (एफडी) को ही चुनते हैं। इनमें यह सुविधा है कि राशि कितनी देय होगी यह पहले से ही ज्ञात रहता है। यहां यह ध्यान देने योग्य है कि यदि आपका सावधि जमा (एफडी) खाता किसी बैंक के साथ है, तब बैंक डिफॉल्ट के मामले में आप डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कारपोरेशन (डीआईसीजीसी) से अधिकतम एक लाख रुपए के मुआवज़े के पात्र होंगे।

2 बचत के प्रमुख उत्पाद आम तौर पर तरल होते हैं, जिसका अर्थ है कि आवश्यकता  पड़ने पर आपके पैसे तुरंत मिल सकते हैं, हालांकि यदि आप आवर्ती जमा या सावधि जमा खातों को समय से पहले बंद करवाते हैं तो आपको कुछ शुल्क देना पड़ सकता है।

3 बचत के प्रमुख साधन जैसे बैंक या डाक घर का बचत खाता, आवर्ती या सावधि खातों के रखरखाव के लिए शुल्क बहुत कम है और आमतौर पर नियमित खाताधारकों के लिए निःशुल्क है।

4 बचत की प्रक्रिया बहुत सी लागतों या शुल्क के बिनाए सरल और आसान है तथा इसमें शोध या अध्ययन की आवश्यकता नहीं होती है।

5 उदाहरण व्यक्तिगत इस्तेमाल की वस्तु खरीद हेतु, नई कार

खरीद, घर खरीदने के लिए डाउन पेमेंट, घूमने या  देश-विदेश भ्रमण के लिए इत्यादि।

महत्त्वपूर्ण तथ्य

1 निवेश करने के लिए विभिन्न विकल्प उपलब्ध है,ं किंतु  इन्हें चुनने से पहले आयु, आय,  परिवार का  आकार, जीवन शैली जैसे विभिन्न पहलुओं पर विचार करना आवश्यक है।

2 लंबी अवधि में बाजार से संबंधित निवेश किसी भी अन्य विकल्प से अधिक लाभ देता है, किंतु पहले से ही यह अनुमानित नहीं किया जा सकता कि किस समय अवधि में आप बहुत अधिक लाभ अर्जित करेंगे अथवा किस अवधि में आपका निवेश मूल से घट जाएगा। उतार-चढ़ाव बाजार का अभिन्न अंग है ।

3 निवेश के माध्यम से आप मुद्रास्फीति से अधिक कमाने की आशा कर सकते हैं। यदि आपकी आय या रिटर्न की दर मुद्रास्फीति की दर से कम है, तो समझिए कि आपका धन समय के साथ क्रय शक्ति खो रहा है।

4 निवेश का मूल आधार है लंबी अवधि तथा धैर्य,  केवल उस पैसे को ही निवेश के लिए उपयोग में लाएं, जिसकी आपको बहुत लंबे समय तक आवश्यकता नहीं होगी।

5 निवेश करना जटिल हो सकता है, यदि आप स्वयं अध्ययन एवं शोध करके निवेश की बारीकियां समझ सकें तब यह आपकी निवेश यात्रा में बहुत सहायक सिद्ध होगा। यदि ऐसा करने में आप स्वयं को अक्षम पाते हैं, तब आपको विशेषज्ञ की सहायता लेनी चाहिए ।

6 उदाहरण बच्चों की शादी हेतु, कुछ वर्षों में अपना व्यवसाय आरंभ करने हेतु, सेवानिवृत्ति, जो वर्षों दूर है, इत्यादि

एक अच्छी वित्तीय रण नीति में बचत एवं निवेश दोनों ही महत्त्वपूर्ण हैं, लंबी अवधि में संपन्नता का मार्ग है नियमित बचत तथा उपयुक्त निवेश। अपनी बचत व निवेश यात्रा से पहले इन बातों का विश्लेषण करें….

1 अपनी आर्थिक स्थिति का आकलन करेंः आप बचत तथा तदोपरांत निवेश के बारे में तभी सोच सकते हैं, जब आपके खर्चे आपकी कमाई से कम हों, इसे पहला तथा सबसे महत्त्वपूर्ण नियम बना लें

दो बातों का ध्यान रखना आवश्यक हैः 1 यदि आप पर कोई बकाया ऋण है, तो उसे चुकता करने का यथा शीघ्र प्रयास करें। 2 एक आपातकालीन निधि बनाएं, जिसमें छह महीने से लेकर एक साल तक के खर्चे के बराबर धन हो, ऐसा करना इसलिए आवश्यक है, ताकि आप अपनी निवेशित संपत्ति से बिलकुल छेड़छाड़ न कर सकें।

2 अपने लक्ष्य निर्धारित करें: हमारे पास उद्देश्य की स्पष्टता और एक योजना होनी चाहिए। इस योजना में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रख कर एक रणनीति बनाइए

दीर्घकालिक लक्ष्य के पूरा होने से कुछ समय पहले उस धन को जोखिम वाले निवेश से निकाल कर अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश  में स्थानांतरित करना इस रणनीति का हिस्सा है।

3 विकल्पों एवं जोखिम को समझेंः यह सुनिश्चित कर लें कि आपका ध्येय  क्या है तथा निवेशित धन आपको कब चाहिए। यदि आप किसी निवेश सलाहकार की सहायता ले रहे हैं, तब भी आपको निवेश के विकल्पों को समझने का प्रयास करना चाहिए, जिससे आपको यह ज्ञात रहे कि कितना पैसा कहां निवेशित है, जोखिम कितना है तथा कितने रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है।

4 कितनी बचत या निवेश करें: यह निर्धारित करना महत्त्वपूर्ण है कि आप आरंभ में कितना निवेश कर सकते हैं तथा कितना मासिक या सालाना निवेश करना जारी रख सकते हैं। इससे आप यह भी समझ सकेंगे कि कौन से निवेश आपके लिए सही हैं, तदोपरांत धीरे-धीरे बचत या निवेश को बढ़ा सकते हैं ।

और अंत में

यदि आप निश्चित नहीं हैं कि आप किसी विशेष लक्ष्य की ओर बचत कर रहे हैं या निवेश कर रहे हैं, तो मूल बातें याद रखें। यदि यह एक अल्पकालिक लक्ष्य है, जिसके लिए आपको अपने धन की सुरक्षा तथा तुरंत उपलब्धता सर्वोपरि है, तो बचत करना शुरू करें। यदि यह एक बड़ा दीर्घकालिक लक्ष्य है, जिसके लिए आप अधिक जोखिम उठाकर अधिक रिटर्न चाहते हैं, तो निवेश करने पर ही विचार करें। यदि तब भी आप सुनिश्चित नहीं हैं कि क्या करना चाहिए या कैसे तब आवश्यक हो जाता है, कि आप किसी वित्तीय सलाहकार की सहायता से इस यात्रा में सफलता प्राप्त करें।

 

 

 

 

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