बच्चों का बनाया रेन शेल्टर दिखा रहा आईना

पंचरुखी—जब गांव बड़े अपने बस स्टॉप पर नेताओं से लेकर विभाग तक वर्षाशालिका की गुहार करके थक गए। तो बच्चों ने स्वयं वर्षाशालिका का जुगाड़ करते हुए स्टॉप पर झाडि़यों मंे बेड शीट की चादर डाल कर धूप से बचने के लिए वर्षाशालिका बना कर सबके मुंह पर अक्ल का थप्पड़ जड़ दिया। शायद अब सबकी आंखंे खुल जाएं बात ग्राम पंचायत टांडा के तहत गांव  पनतेहड़ पढियार बस्ती के वार्ड चार की है, जहां बस स्टाप पर 2016 में वर्षाशालिका के लिए आवेदन किया गया व तत्कालीन विधायक ने भी अपना डीओ दिया था। जबकि कार्य न होने पर फिर से आग्रह भेजा व विधायक आशीष बुटेल ने भी डीओ जारी किया। विभाग में एसडीओ से लेकर चीफ तक कागजात भेज दिए गए। लेकिन रिजल्ट ढाक के तीन पात वाला रहा। यहां तक कि वर्षाशालिका के लिए भूमि भी विभाग को दी गई है। लेकिन कार्य शुरू नहीं हुआ। शायद यह वर्षाशालिका राजनीति का शिकार हो  रहा है। बताते चलें कि इस बस स्टॉप से लोग विशेषकर स्कूली बच्चे वाहन का इंतजार करते हैं जबकि अभिभावक भी सुबह-शाम बच्चो को लेने व भेजने को रुकते हैं। जबकि  वर्षाशालिका न होने से बारिश व धूप में खड़े रहने को मजबूर हंै। परेशान बच्चों ने सरकार व विभाग के उदासीन रवैये व बड़ों की असमर्थता के बाद स्वयं झाडि़यों में चादर डाल कर धूप से बचने के लिए वर्षाशालिका बना ली और वहीं मिल कर बैठते हैं। इस उम्मीद से कि शायद विभाग व सरकार को होश आए, जो बच्चों को भारत का भविष्य कहता नहीं थकता व भविष्य को सुरक्षित  रखने के प्रति लापरवाह है। अब नौनिहालों ने मुख्यमंत्री, विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र डाल कर वर्षाशालिका के लिए आखिरी प्रयास किया है।

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