बच गई मंडी की डीएनबी सीटें

मंडी—जोनल अस्पताल मंडी में डीएनबी की गायनी सीटें बच गई हैं। आठ साल के विशेषज्ञ गायनी डाक्टर के तैनात न होने के चलते सीटों को लेकर डिप्लोमेट नेशनल बोर्ड लैटर में अल्टीमेटम दे दिया था। ऐसे में तय समय के भीतर यदि गायनी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होती तो डीएनबी स्टूडेंट्स को दूसरे राज्य में शिफ्ट किया जाना था। डीएनबी के अल्टीमेटम के बाद एक पांच साल के अनुभव वाले डाक्टर की तैनाती तो हो चुकी थी, लेकिन आठ साल से ज्यादा अनुभव वाले डाक्टर ने यहां ज्वाइन नहीं किया था। पिछले ही सप्ताह दूसरे गायनी विशेषज्ञ ने भी जोनल अस्पताल मंडी ज्वाइन कर लिया है। इसलिए डीएनबी सीटों पर संकट तो टल ही गया है, बल्कि मरीजों को भी फिर से सुविधा मिलना शुरू हो गई है। जोनल अस्पताल में अब गायनी विशेषज्ञ डाक्टरों की संख्या तीन हो गई है, जबकि छह गायनी में डीएनबी कर रहे स्टूडेंट्स भी हैं। यहां बता दें कि पहले नेरचौक मेडिकल कालेज जोनल अस्पताल के साथ अटैच था, लेकिन पिछले साल अक्तूबर में मेडिकल कालेज नेरचौक शिफ्ट हो गया। इसके चलते जोनल अस्पताल में मात्र एक ही गायनी विशेषज्ञ रह गए, लेकिन उनकी भी फरवरी माह में मौत हो गई थी। इसके बाद काफी समय तक जोनल अस्पताल में कोई डाक्टर तैनात नहीं था। कभी नेरचौक मेडिकल कालेज तो कभी शिमला से डाक्टर यहां प्रतिनियुक्ति पर भेजे जा रहे थे, जबकि डीएनबी स्टूडेंट्स के लिए दो गायनी विशेषज्ञ डाक्टरों की स्थायी नियुक्ति की जरूरत थी। अब डाक्टरों की स्थायी नियुक्ति होने के साथ ही मरीजों को फिर सहूलियत मिलना शुरू हो गई है।

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