बड़े काम के हैं ये जैव संसाधन

बीबीएन—हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सहयोग से बद्दी में ‘प्रदेश में विद्यमान जैव विविधता और उद्योगों में इसका उपयोग’ विषय पर सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन के दौरान उद्यमियों को जैव विविधता, इसके महत्त्व, इसके घटकों के संरक्षण और सतत उपयोग के साथ-साथ जैव विविधिता अधिनियम, 2002 एवं लाभ साझाकरण प्रावधानों के बारे में अवगत करवाया गया। हिमाचल प्रदेश में, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन और लोगों के उत्थान के लिए एक संभावित साधन रूप में जैविक संसाधनों की क्षमता, गुंजाइश और महत्त्व को देखते हुए, वर्तमान ‘जैव-संसाधन सम्मेलन’ का आयोजन किया गया, जिसमें इन सभी संवेदनशील और महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान प्रदेश जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव डीसी राणा ने कहा कि वैश्विक जैविक संसाधन के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश का अहम योगदान है। प्रदेश में काफी मात्रा में जैव संसाधनों की उपलब्धता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जैविक उत्पादों की स्थानीय प्रजातियां उपलब्ध होने से ग्रामीण स्तर पर सामाजिक व आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं हैं , जिसे जैव विविधता बोर्ड, उद्योग, ग्रामीण विकास संस्थानों तथा शिक्षाविदों के सहयोग व समन्वित प्रयासांे से सुनिश्चित किया जा सकता है। सम्मेलन में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष पीएल गौतम, पूर्व महानिदेशक एनबीपीजीआर (नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्स) प्रो. पुष्पा कुमार लक्ष्यमणन, राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह, अध्यक्ष सीआईआई, हिमाचल प्रदेश राज्य परिषद हरीश अग्रवाल, कर्नल शैलेश पाठक, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड शुभ्रा बैनर्जी तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

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