बता दो सरकार, यहां पर और कितने हादसों का है इंतजार

नेरवा—एलपीआरआर से नामित जिला सिरमौर के शिलाई, शिमला के रोहड़ू और उत्तराखंड के त्यूणी क्षेत्र के लोगों की भाग्य रेखा कहलाए जाने वाले एनएच 707 पर सुरक्षा की अनदेखी के लिए लोगों ने चौपाल के विधायक के साथ-साथ सरकार में शिलाई का प्रतिनिधित्व करने वाले नेतों को भी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इन क्षेत्रों के लोगों के कृषि और बागबानी  उत्पाद मंडियों तक पंहुचाने के लिए यह सबसे नजदीकी मार्ग है व इस सड़क पर प्रतिदिन हजारों लोग जान जोखिम में डालकर वाहनों से आवाजाही करते हैं। लोगों का कहना है कि सरकार के नुमाइंदे सड़क पर सुरक्षा के मुद्दे को सरकार के समक्ष उठाने में पूरी तरह असफल रहे हैं। इस सड़क पर शिलाई से लेकर फेडिजपुल तक सुरक्षा के नाम पर कच्चे और अस्थाई पैरापिट या मिटटी भरे ड्रमों के अतिरिक्त कुछ भी नजर नहीं आता। मीनस पुल से फेडिजपुल तक 18 किलोमीटर मार्ग सबसे अधिक दुर्घटना संभावित मार्ग है। इस मार्ग पर पिछले तीन चार सालों में दर्जनों हादसों में सैंकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। 19 अप्रैल 2017 को उत्तराखंड की एक निजी बस हादसे को क्षेत्र के लोग कई पीढि़यों तक नहीं भुला पाएंगे। इस दर्नाक हादसे में यह अभागी बस हजारों फुट गहरी खाई में जा गिरी थी व बस के साथ-साथ इसमें सवार 45 लोगों के भी चीथड़े उड़ गए थे। इस हादसे में मरने वालों में उत्तराखंड, यूपी, बिहार, नेपाल सहित जिला शिमला के चौपाल और रोहड़ू जुब्बल आदि क्षेत्रों के लोग शामिल थे। इतना बड़ा और दिल को दहला देने वाला हादसा होने के बावजूद विभाग और सरकार कुम्भकर्णी निद्रा में सोई हुई है। यहां पर दो साल बीत जाने के बावजूद भी आज तक क्रैश बैरियर नहीं लग पाए हैं। सुरक्षा के नाम पर यहां तारकोल के खाली ड्रमों में मिट्टी भर कर इन्हें सड़क के किनारे खड़ा कर दिया गया है। हादसाग्रस्त बस के शिकार लोगों की याद में बने दर्जनों मंदिर और इन मंदिरों पर लहराती झंडियों को देख कर इधर से गुजरने वाले लोगों के कलेजे थरथरा उठते है। मीनस पुल से फेडिजपुल तक 18 किलोमीटर इस सड़क को खूनी सड़क की संज्ञा दी जाए तो भी कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि इस सड़क के हरेक मोड़ के साथ किसी न किसी हादसे का किसा जुड़ा हुआ है यानि इस सड़क के हरेक मोड़ पर यमराज का साक्षात पहरा है। इतने हादसे होने पर भी मीनस पुल से फेडिजपुल के मध्य सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाये गए हैं। 18 किलोमीटर इस मार्ग पर आज तक न तो कोई क्रैश बैरियर लगा है न ही पैरापिट बनाये गए हैं। या यूं कह लें कि इस मार्ग पर खुद विभाग और सरकार ने ही यमपुरी के द्वार सजाए हुए हैं। हैरानी की बात है कि चौपाल के विधायक बलवीर वर्मा भी अपने लाव लश्कर के साथ इस सड़क और इस स्थान से अनगिनत बार गुजर चुके हैं परंतु उनकी नजर मौत के इन खुले दरवाजों पर ना पड़ना अपने आप में हैरानी भरा है। इस सड़क में हो रहा मेटलिंग का कार्य भी शुरू से ही विवादों में रहा है। कभी इस की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं तो कभी ठेकेदार द्वारा समय पर कार्य शुरू न करने पर इसके टेंडर रद्द हुए हैं। सिरमौर के बोहराड़ खड्ड से फेडिजपुल तक दो बार टेंडर रद्द होने के बाद जिस ठेकेदार को टेंडर दिया गया था उसने मेटलिंग तो कर दी है परन्तु यह एक माह के भीतर ही जगह जगह उखड़नी शुरू हो गई है। बहरहाल, इस सड़क की अनदेखी पर लोगों का सरकार और स्थानीय विधायक से बस एक ही सवाल है कि सरकार अब तो बता दो इस सड़क पर आपको और कितने हादसों का इंतजार है।

 

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