बांस के सामान को बड़ी मार्केट

सरकार ने हस्तशिल्प-हथकरघा निगम को सौंपे प्रोजेक्ट, छोटे उद्यमियों को देंगे लाभ

शिमला – प्रदेश में बांस पर आधारित प्रोजेक्ट यूं तो काफी पुराना है, लेकिन अब जयराम सरकार इसे नए सिरे से बनाकर इसमें लघु उद्यमियों को प्रोत्साहित करना चाहती है। इसका जिम्मा हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम को दिया गया है, जो इस काम में जुट गया है। निगम ने इसके लिए एक कार्य योजना भी सोची है, जिस पर निदेशक मंडल की बैठक में चर्चा हो चुकी है। हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम गांवों में बसे ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करेगा, जो बांस से काम करते हैं। उनकी रोजी-रोटी इसी से चलती हो, उन्हें विशेष प्रोत्साहन देकर आगे लाने की सोची जा रही है। साथ ही बांस से बने सामान को एक बड़ी मार्केट यहां मिले, इसके लिए भी काम किया जाएगा। राज्य में कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां बांस काफी ज्यादा संख्या में मिलता है। इसमें मंडी, हमीरपुर, ऊना, बिलासपुर प्रमुख हैं, जहां लोग भी लंबे समय से बांस के उत्पाद तैयार करते हैं। ऐसे लोगों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को बड़ी मार्केट देने का काम किया जाएगा। हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम  प्रदेश के प्रवेश द्वारों पर ऐसी जगह चाहता है, जहां गांव के लोगों द्वारा तैयार हस्तशिल्प व हथकरघा उत्पादों को बिक्री के लिए रखा जाए। बाहर से यहां आने वाले लोग ये उत्पाद देखें और उनकी डिमांड करें। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर भी निगम प्रदर्शनियोें में हिस्सा लेगा और उत्पादकों को वहां भेजने की व्यवस्था करेगा। इतना ही नहीं हिमाचल में निगम के जो इंपोरियम हैं, उनमें भी बांस पर आधारित उत्पादों को बिक्री के लिए विशेष रूप से रखा जाएगा।

उत्पादन बढ़ाने पर रहेगा ज़ोर

राज्य में बांस के उत्पादन में भी बढ़ोतरी करने की योजना है। लोगों के लिए बांस उनकी जीवन यापन में मददगार साबित हो इसके लिए लोगों को बताया जाएगा और उन्हें इस उद्योग से होने वाले फायदों के बारे में बताएंगे, ताकि लोग इसके उत्पादन में बढ़ोतरी करें। प्रदेश के मंडी जिला में बांस काफी ज्यादा मात्रा में होता है। जिला के धर्मपुर से पंजाब के व्यापारी औने-पौने दाम देकर बांस खरीदकर ले जाते हैं, जिससे उत्पादकों को कुछ ज्यादा हासिल नहीं हो पाता। उत्पादन बढ़ाने के साथ इस काम के लिए भी बड़ी मार्केट दी जाएगी, ताकि अधिक दाम मिल सकें।

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