बागबानों को बागबाग करेगा सेब 

2010 में 4 करोड़ सेब पेटी पैदावार

हिमाचल में वर्ष 2010 में सेब की बंपर क्रॉप हुई थी। उस दौरान 4 करोड़ के लगभग सेब बॉक्स मार्केट में पहुंचे थे।  जबकि 2016 में यह दर 2.35 करोड़ सेब बॉक्स और 2017 में 2.79 करोड़ सेब बॉक्स रहे। अब इसके बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। इस साल भी राज्य में चार करोड़ सेब बाक्स के उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है।

-टेकचंद वर्मा, शिमला

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बागबानी एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इस बार राज्य में सेब की रिकॉर्ड तोड़ पैदावार होगी।  हालांकि राज्य में तूफान व ओलावृष्टि ने जमकर कहर बरपाया था। राज्य के कई सेब उत्पादक क्षेत्रों में सेब की करोड़ों की फसल तबाह हो गई है। प्रदेश में सेब की फसल को करीब 40 करोड़ का नुकसान हुआ था। मगर इसके बाबजूद राज्य में सेब की बंपर फसल की उम्मीदें लगाई जा रही है। बागबानी विभाग द्वारा लगाए गए आंकलन के तहत राज्य  में इस सेब सीजन के दौरान बीते सीजन के मुकाबले दोगुनी पैदावार होगी। बागबानी विभाग के मुताबिक राज्य में साढे़ तीन करोड़ से चार करोड़ बॉक्स तक सेब का उत्पादन होगा। जो राज्य की आर्थिकी व बागबानों के लिए राहत भरी खबर है। हिमाचल प्रदेश में बीते वर्ष सेब का उत्पादन कम हुआ था। ऐसे में बागबानों को फसल के अच्छे दाम मिले थे। हालांकि राज्य में इस बार सेब की पैदावार अधिक होने की उम्मीदें है। मगर बागबानों को फसल के दाम बीते साल के मुकाबले कम मिल सकते हैं। पिछले वर्ष सूखे के कारण सेब की अच्छी फसल नहीं हो पाई थी। जब बागीचों में फूल आ रहे थे तो तूफान ने फ्लावर सेटिंग से छेड़छाड़ की। यही, वजह रही कि अपेक्षाओं के अनुरूप सेब की फसल नहीं हो पाई। इस बार भी बागबानी पर खतरा मंडरा रहा था। मगर विटर सीजन के दौरान अच्छी बर्फवारी होने व बारिश होने के कारण सेब के बागीचों में सेब की अच्छी सेटिंग हुई है।

माटी के लाल : विवेक बने किसानों के रोल मॉडल

कांगड़ा जिला की घाड़जरोट पंचायत के नौजवान विवेक आज हजारों किसानों के रोल माडल बन गए हैं। विवेक डेढ़ सौ कनाल जमीन पर खेती करते हैं। अपने खेतों से रोज एक क्विंटल मूली और खीरा निकालना विवेक का रूटीन वर्क है। नगरोटा सूरियां विकास खंड में शायद ही कोई ऐसी दुकान या मार्केट हो, जहां विवेक की सब्जी की चर्चा न हो। विवेक के दायरे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह रोज 50-50 किलो तो पालक और धनिया ही निकालते हैं। उन्होंने अपनी माटी टीम को बताया कि वह डेढ़ सौ कनाल जमीन में खेती कर रहे हैं। इनके खेतों में  सब्जी के साथ धान भी खूब लहलहाते हैं। विवेक जमा दो तक पढ़ाई के बाद साल 2005 में स्वरोजगार अपनाया, लेकिन उनकी लाइफ में चेंज वर्ष 2012 के बाद आया, जब उन्होंने खेती हाइटेक तरीके से करना शुरू की, बस फिर क्या था। आज विवेक 50 हजार मासिक कमाई कर रहे हैं। इनकी गिनती हिमाचल के अग्रणी किसानों मे होती है। विवेक के पास ट्रैक्टर से लेकर खेती का हर आधुनिक उपकरण मौजूद है और एक बड़ा तालाब भी बना रखा है,जहां से खेतों की सिंचाई की जाती है। इसी बहाने वह तालाब में मछली भी पाल रहे हैं। यही नहीं, खेतों में देसी खाद के लिए उन्होंने 10 पशु पाल रखे हैं। रोजाना 25 किलो दूध भी इन्हीं गाय-भैंस से मिल जाता है।

किसानों को टिप्स

खेतों में देसी खाद यूज करें। 10 पशु रखे हैं। रोज 25 किलो दूध निकालते हैं। किसान के लिए सबसे बड़ा सफलता का मंत्र यह है कि पानी अपना होना चाहिए। पानी अगर खुला नहीं है,तो सब्जी की खेती भूल जाएं।

-रामस्वरूप शर्मा, नगरोटा सूरियां

जंगली घास और गोबर से बनेगा कागज

डा. संजय कुमार

सीएसआईआर के निदेशक 

खेतों में जंगली घास से तंग किसान-बागबानों के लिए राहत भरी सूचना है। जंगली घास की कुछ किस्में ऐसी हैं कि उनपर कोई स्प्रे भी असर नहीं करता, लेकिन अब जंगली घास से डरने की कोई जरूरत नहीं है। सीएसआईआर पालमपुर के वैज्ञानिकों ने ऐसी तरकीब खोजी है, जिससे जंगली घास और गोबर से कागज तैयार होगा। वैज्ञानिकों ने लैंटाना, कांग्रेस घास व गोबर से सेलूलोस निकालने में कामयाबी हासिल की है। वैज्ञानिकों की मानें, तो अब वह दिन दूर नहीं जब गाय के गोबर से कागज बनाया जाएगा। गौर रहे कि कागज मूलतः कुछ किस्म के पेड़ों से मिलने वाले पदार्थां से तैयार जाता है। ऐसे में नई तकनीक लाखों किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है।

– जयदीप रिहान, पालमपुर

इंग्लैंड – अमरीका की रसोई में हिमाचली लहसुन

करीब चार सालों के बाद अच्छे दाम बटोरने से किसानों को खुश करने वाला हिमाचली किसानों का लहसुन ब्रिटिश और अमरीकी पकवानों का स्वाद बढ़ाएगा। चाइना के बाद लहसुन उत्पादन में टॉप देश का इंडियन गारलिक इंग्लैंड और अमरीका सहित दुनिया भर के एक दर्जन से भी अधिक देशों को निर्यात होने लगा है, तो हाल ही के सालों से नकदी फसल उत्पादन में आश्चर्यजनक प्रगति करने वाले हिमाचली लहसुन भी इसमें शामिल होने को तैयार है। राज्य में लहसुन की फसल तैयार हो गई है और किसान इसकी पैकिंग-ग्रेडिंग के मिशन में जुट गए हैं। लिहाजा, स्थानीय मंडियों के साथ सीधे व्यापारियों के माध्यम से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मार्केट में यह फसल पहुंचाने को कुल्लू सहित अन्य जिलों में बाहर से दस्तक देने लगे हैं, जो सीधे ही किसानों की फसल का मोलभाव कर देश-विदेश की मंडियों में पहुंचाएंगे। जानकारी के मुताबिक कुल्लू सहित अन्य जिलों में किसान लहसुन को खेतों से निकालने में जुटे हैं। जानकारों की मानें तो हिमाचली लहसुन की दक्षिण भारत में भी अच्छी डिमांड रहती है। दिलचस्प यह कि देश में सबसे अधिक लहसुन पैदा करने वाले गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की फसल दाम के नाम पर हिमाचली फसल के आगे नतमस्तक हो जाती है। कारोबारियों के अनुसार इसका मुख्य कारण प्रदेश की फसल का अलग स्वाद है। इस व्यापार से जुड़े कारोबारियों की मानें, तो इंग्लैंड, अमरीका, कनाडा, मलेशिया, थाइलैंड, बांग्लादेश, पाकिस्तान सहित दर्जनों देशों को निर्यात की जा रही खेप में भी हिमाचली लहसुन को विशेष एहमियत दी जा रही है। हालांकि कुछ सालों से पड़ोसी पाकिस्तान के लिए सप्लाई प्रभावित हुई है। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें, तो राज्य में करीब चार हजार हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की पैदावार होती है और करीब 40 से 45 हजार मीट्रिक टन तक फसल उत्पादन होता है।     

– हीरालाल ठाकुर, भुंतर

गंगथ दंगल जस्सा पट्टी  के नाम  

उतरी भारत के बड़े दंगलों में शुमार गंगथ की छिंज देश के नामी पहलवान जस्सा पट्टी ने अपने नाम  कर ली। हजारों दर्शकों की मौजूदगी में हुए फाइनल में जस्सा ने धाकड़ पहलवान प्रीतपाल को पटकनी दे दी। विजेता को कार, नकदी व सोने की चेन से सम्मानित किया गया। दूसरे फाइनल में मौसम खत्री ने धर्मेंद्र को हराकर कार अपने नाम की। तीसरे ऐसे ही मुकाबले में सतेंद्र ने बिनिया को मात दे दी। उधर हिमाचली पहलवानों के मुकाबले लंबानाल के अरूण ने जीता। वहीं महिला मुकाबले को गुरशरण कौर ने अपने नाम किया। 

जगदेव डढवाल, गंगथ

धांसू योजनाओं से जुड़ें बागबान

क्या आपको पता है हिमाचल सरकार प्रदेश में बागबान भाइयों के लिए एक से बढ़कर एक योजना शुरू कर रखी है। ये वे योजनाएं हैं,जिनसे बागबान भाई कम खर्च करके लाखों की कमाई कर सकते हैं। बस योजनाओं का पता होना चाहिए। हमारे पास प्रदेश भर के बागबान विभागीय योजनाओं को लेकर संपर्क कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रमुख योजनाओं में सामान्य विकास योजना, अनुसूचित जाति विशेष योजना, पिछड़ा क्षेत्र उपयोजना आदि शामिल हैं। इसके अलावा पुष्पक्रांति योजना, मधु विकास योजना भी है। बस  आपको नजदीकी उद्यान प्रसार या विकास अधिकारी से मिले वे आपकी मदद कर सकते हैं।

आप सवाल करो, मिलेगा हर जवाब

आप हमें व्हाट्सऐप पर खेती-बागबानी से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी भेज सकते हैं। किसान-बागबानों के अलावा अगर आप पावर टिल्लर-वीडर विक्रेता हैं या फिर बीज विक्रेता हैं,तो हमसे किसी भी तरह की समस्या शेयर कर सकते हैं।  आपके पास नर्सरी या बागीचा है,तो उससे जुड़ी हर सफलता या समस्या हमसे साझा करें। यही नहीं, कृषि विभाग और सरकार से किसी प्रश्ना का जवाब नहीं मिल रहा तो हमें नीचे दिए नंबरों पर मैसेज और फोन करके बताएं। आपकी हर बात को सरकार और लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इससे सरकार को आपकी सफलताओं और समस्याओं को जानने का मौका मिलेगा।

edit.dshala@divyahimachal.com

(01892) 264713, 307700

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मौसम : आने वाले पांच दिनों के मौसम का पूर्वानुमान

अगले पांच दिनों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है इसलिए सभी फसलों में सिंचाई करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ-साथ खरपतवार निकालकर मल्चिंग करें। सेब में नत्रजन की आधी मात्रा डालें तथा सूक्ष्म तत्वों की कमी दूर करने लिए मल्टीपलैक्स, टरैसल या एग्रोमिन का छिड़काव करें। किवी में हाथ से परागण करें। आम में हॉपर कीट के नियत्रंण के लिए मासक्राम/न्यूवाक्रान 40 मिली/200 मिली का 200 लीटर पानी के  हिसाब से छिड़काव करें।

सब्जी फसलों संबंधित कार्यः

टमाटर, बैंगन, शिमलामिर्च, तेज मिर्च, खीरा, करेला, कद्दू वर्गीय फसलों, भिंडी तथा फ्रासबीन में खरपतवार निकालें, सिंचाई करें तथा नत्रजन की मात्रा डालें। मध्यवर्ती व उपरी क्षेत्रों में इन फसलों की तैयार पौध की रोपाई करें। इन फसलों में तेले की रोकथाम के लिए आक्सीडेमेटॉन मिथाइल का 1 मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।

परिक्षण कार्यः

लीची का रस, स्क्वैश आदि बनाए जा सकते हैं। आम से आचार, चटनी, आमचूर, मुरब्बा, जैम, स्क्वैश, नेक्टर तथा पापड़ बनाए जा सकते हैं।

-मोहिनी सूद, नौणी

गुणों की खान है त्र्यांबल का बूटा

यह एक प्रकार का जंगली पौधा है, जो कि हमारे प्रदेश के साथ-साथ पूरे एशिया में पाया जाता है। यह पौधा अकसर जंगलों, सड़क किनारे, खेतों और घास के मैदानों में पाया जाता है। यह सामान्यता 10-12 मीटर लंबा होता है। हिमाचल प्रदेश में यह 1700 मीटर तक लंबा उगने वाला बहुत ही गुणकारी पौधा है। इस पौधे का वानस्पतिक नाम फिक्स सेम्सवर्ग है। और इसे अनेक नामों से जाना जाता है। जैसे  त्र्यांबल, त्रिबंल, डैबरू, गुलर आदि। इसे हाथी कान अंजीर पेड़ भी कहा जाता है। क्योंकि इसके पत्ते बहुत बड़े होते हैं, जो कि हाथी के कान की याद दिलाते हैं। इस पौधे में फल इसके तने के साथ पाए जाते हैं।

औषधीय और खाद्य उपयोग

इसके कच्चे फलों का उपयोग सलाद के रूप में किया जाता है। और पक्के हुए फलों का उपयोग सब्जी बनाने के रूप में किया जाता है। जैसे रस और करी में किया जाता है।  इसे घावों में उपचार के लिए भी उपयोग किया जाता है। इसके पक्के हुए फलों में मीठी जैली घुलनशील लवण पाया जाता है। फलों में विटामिन सी, प्रोटिन, खनीज तत्व, जैसे की पोटाशियम, कैल्शियम, मैग्निशियम इत्यादि पाए जाते हैं। यह पक्का हुआ फल खाने में बहुत मीठा और एक आकर्षिक जैली से भरा हुआ होता है, जो कि खाने में अनेक गुणों से भरा हुआ होता है।

मंजू लता सिसोदिया

सहायक प्राध्यापक वनस्पति

विज्ञान, एमएलएसएम कालेज सुंदरनगर एवं भूतपूर्व सहायक प्राध्यापक वनस्पाति विज्ञान केंद्रीय विश्वविद्यालय वाराणासी

किसान बागबानों के सवाल

1  गर्मियों में मुर्गियों को बीमारी से बचाने के लिए क्या करें?

मुर्गियों को बीमारियों से बचाने के लिए मुर्गीघरों में नमी मत होने दें। मुर्गीघरों में डीप-लीटर को दुसरे-तीसरे दिन उलट दें, ताकि बीमारी न फैले। ब्राईलर को लगातार फीड देते रहें।

विनोद, ऊना

2. अनार पर फूल आने के बाद उसे कीट से बचाने के लिए कौन सी दवाई का छिड़काव करें?

अनार में फूल आने पर छेदक कीट की रोकथाम के लिए cypermethrin 1 मिलि लीटर प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें। आम में फूल आने पर आम हूपर की रोकथाम के लिए Emidachloprid or carbaryl 0.0036% का घोल 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। मिलीबग व होपर कीट की निगरानी करते रहें।

राजेंद्र, शिमला

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