बुक फेयर में बच्चों की कहानियां

शिमला—राजधानी शिमला के गेयटी थियेटर में भाषा संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित साहित्यिक व सांस्कृ तिक कार्यक्रम पुस्तक मेले में रविवार को काफी संख्या में लोग पहुंचे। इस मेले के दूसरे दिन लोगों द्वारा काफी पुस्तकें खरीदी गईं। अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में युवाओं, बच्चों, बुजुर्गों सहित अन्य राज्यों से आए लोग भी बढ़-चढ़कर लुत्फ उठा रहे हैं। इस मेले में छोटे बच्चों सहित कक्षा 8वीं तक के  छात्रों के लिए तरह-तरह की कहानियों की किताबें लगाई गई हैं। स्कूली बच्चों को यहां पर लगी हर एक पुस्तक बहुत ही पसंद आ रही है। वहीं, बात करें बुजुगों की तो उनके लिए भी इस मेले में विशेष तौर पर आधात्मिक, ग्रंथ, ज्ञानवर्धक, साहित्यक पुस्तकों का भंडार लगा है। लोग काफी संख्या में यहां से पुस्तकें  खरीद रहे हैं। यह अंतरराष्ट्रीय मेला न केवल शिमला अपितु बाहरी राज्यों से आए सैलानियों को भी काफी पसंद आ रही है। शिमला में इन दिनों पर्यटन सीजन के चलते बाहरी राज्यों से काफी संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। वहीं माल रोड पर स्थित पुस्तक मेले को देखने भी जा रहे हैं। अधिकतर सैलानियों ने बताया कि उन्हें पुस्तक मेला काफी पसंद आया। इस मेले में वे पुस्तकें हंै जिन्हें बहुत पहले पढ़ा करते थे। इस मेले को देखने के लिए शहर के युवाओं में खासा क्रेज देखा गया। युवाओं में अधिकतर ऐसे स्टूडेंट थे जो कालेज ओर यूनिवर्सिटी जाते हैं। उन्होंने बताया कि शिमला में इस तरह का पुस्तक मेला समय समय पर होता रहना चाहिए। इससे खास तौर पर युवाओं में अध्यात्मिक व पढ़ने की क्षमता,किताबों से प्रेम जैसी भावनाओं का विकास होता है। अच्छी किताबें लोगों का मन बहलाती हंै, अच्छी बातें सिखाती हैं। वे बच्चों को प्यारी प्यारी कहानियां बताती हैं। कहानियों के जरिये किताबें लोगों को जीवन के मूल्यों की शिक्षा देती हैं। युवाओं ने इस मेले की खूब प्रशंसा की और इस तरह के पुस्तक मेले का आयोजनों का होना बहुत जरूरी बताया। हालांकि आज के दौर में अधिकतर युवा मोबाइल कम्पयूटर से ऑनलाइन स्टडी करते हैं। ऐसे में छात्र सही मायनों में पुस्तकों से दूर हो रहे हैं, जो कि सही नहीं है। युवाओं को जरूरत है कि वे किताबों के महत्व को समझें, किताबों से प्रेम करंे। पुस्तकें सबसे अच्छी मित्र होती हैं।

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