भगत सिंह के साथी का परिवार आज पाई-पाई को मोहताज

स्वतंत्रता सेनानी गोकुल सिंह की फैमिली बीपीएल में, छोटा बेटा 18 साल पहले हादसे के बाद बिस्तर पर ही ले रहा सांसें

सुंदरनगर – स्वतंत्रता संग्राम में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के साथी रहे बिलासपुर जिला के गंगलोह गांव के निवासी गोकुल सिंह का परिवार आज बेहद दयनीय हालत में है। इसका खुलासा उस समय हुआ जब गोकुल सिंह की जीवनी जानने के लिए युवा क्षत्रिय संघ शाखा सुंदरनगर का दल मुख्य संरक्षक कृष्ण चंद महादेविया के नेतृत्व में उनके पैतृक गांव पहुंचा। वहां पर स्व. गोकुल सिंह के परिवार की दयनीय हालत देख कर वे हैरान रह गए। स्वतंत्रता सेनानी का परिवार सरकार की उपेक्षा के चलते बीपीएल श्रेणी में रह कर किसी तरह अपना गुजर बसर कर रहा है। स्वतंत्रता सेनानी गोकुल चंद के छोटे पुत्र सोहन सिंह एक हादसे के बाद पिछले 18 सालों से बिस्तर पर हैं। उनके उपचार को भी सरकार से कोई मदद न मिल रही है। इस मौके पर युवा शाखा की ओर से सरदार सुरेंद्र सिंह व संजय सिंह गुमरा ने स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र को पांच हजार की आर्थिक मदद प्रदान की। गोकुल सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए सोहन सिंह ने बताया उनके पिता 17 वर्ष की आयु में लाहौर चले गए थे। वहां वह भगत सिंह के साथियों के संपर्क आए। उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ छपने वाले इश्तेहार लोगों के घरों के बाहर लगाने का काम दिया गया। वह 1931 में पहली बार अंग्रेजों के हाथ आए, लेकिन वह उनको चकमा देने में कामयाब रहे। वह दो बार हिरासत में रहे। कृष्ण चंद महादेविया ने बताया कि क्षत्रिय संघ की युवा शाखा प्रदेश के महान स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी पर पुस्तक प्रकाशित करने जा रही है, जिसके लिए उनके बारे में जानकारी जुटा कर परिवार के सदस्यों से मिल उनकाजीवन परिचय जाना जा रहा है, लेकिन जो हालत आज स्वतंत्रता संग्राम के सिपाहियों के परिवारों की है, उसे देख कर बेहद दुख हो रहा है। क्षत्रिय संघ के प्रेस सचिव सुरेंद्र सिंह व उपाध्यक्ष संजय सिंह गुमरा ने बताया कि संघ इन परिवारों के स्थिति के बारे में सरकार को ज्ञापन भेजा जाएगा। 

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