भैया जी…क्या आपको पता है, देहरा अस्पताल कहां है

 देहरागोपीपुर—अगर आप देहरा अस्पताल आ रहे हैं तो आपको घर से एक घंटा पहले निकलना पड़ेगा, क्योंकि अस्पताल को आपको सुई की तरह ढूंढना पड़ेगा। आलम यह है कि अस्पताल तो उसी जगह पर है, लेकिन अस्पताल का साइन बोर्ड न तो देहरा के मुख्य चौक पर है और न ही अस्पताल के मेन गेट पर कोई साइन बोर्ड है। भाई जी देहरा अस्पताल कहां हैं। ताजा घटनानाक्रम के अनुसार मंगलवार को  जंबल बस्सी से अपनी माता के बलगम की जांच करवाने देहरा अस्पताल को ढूंढ रही अनिता देवी का। अनिता ने बताया कि वह अपनी मां सावित्री देवी (70) की बलगम जांच के लिए बुधवार को अस्पताल का पता पूछ रही थी। महिला का कहना था कि वह जमा दो तक पढ़ी है, लेकिन कोई सूचना बोर्ड न होने के कारण उन्हें अस्पताल पहुंचने के लिए बस स्टैंड से एक घंटा लग गया। इसके अलावा अपने घुटने की जांच करवाने  बनखंडी  से अस्पताल आई रीना देवी 45 ने बताया कि वह भी पहली मर्तबा चेकअप करवाने आई है, लेकिन अस्पताल ढूंढने में काफी समय लग गया। इसके अलावा अस्पताल में उपचार के लिए आए अमित, राम कुमार, सीता व सलोचना का कहना है कि अस्पताल में साइन बोर्ड लगे हो, तो  साथ लगते गांवों से आने वाले मरीजों का दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इनका यह भी कहना था कि अस्पताल प्रशासन को चाहिए कि हनुमान चौक में भी साइन बोर्ड लगे, तो नैहरनपुखर, ढलियारा, लंबीपुखर, बढलठौर व साथ लगती पंचायतों के लोगों को टीएमसी- धर्मशाला नहीं जाना पड़ेगा। 

यह है विडंबना

सिविल अस्पताल में अगर आप चैकअप करवाने आ रहे हैं, तो घर से एक घंटा पहले निकले, क्योंकि अस्पताल ढूंढने में आपको समय लग सकता है। बता दें कि हनुमान चौक से मेन चौक तक और मेन चौक से अस्पताल तक अस्पताल प्रशासन द्वारा कोई भी दिशा सूचक नहीं लगाया गया  है, जिसके कारण अस्पताल ढूंढने में ही मरीजों को काफी मुसीबतों से दो चार होना पड़ता है।

यह हैं मौजूदा हालात

मौजूदा दौर में नौ चिकत्सक तैनात है। इसमें दो हड्डी रोग  स्पेशिलिस्ट, एक सर्जन तैनात है। बड़ा प्रश्न तो यह है कि या तो देहरा और आसपास के गांवों की डेढ़ लाख की आबादी का स्वास्थ्य ठीक है या फिर उन्हें अस्पताल ढूंढ़ने में काफी दिकत होती है। हालांकि सिविल अस्पताल में अगर चिकित्सकों की बात करें, तो अस्पताल में अभी पांच डाक्टरों की कमी है।

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