मंगेशी मंदिर, गोवा

खूबसूरत समुद्री किनारे और वैश्विक महत्त्व वाले चर्च के बीच गोवा में कई ऐसे हिंदू धार्मिक स्थल हैं, जो भारतीय इतिहास के महत्त्वपूर्ण अंग है। इन्हीं में से एक है मंगेशी मंदिर। मंगेश भगवान शिव का ही एक रूप है। गोवा की राजधानी पणजी के नजदीक बना मंगेशी मंदिर उन्हीं को समर्पित है। यहां भगवान शिवलिंग के रूप में स्थापित हैं। इससे पहले ये शिवलिंग गोवा की ही कुशस्थली यानी कोर्टलिम में था, लेकिन पुर्तगालियों के आक्रमण की वजह से कौंडिन्य और वत्स गोत्र के सारस्वत ब्राह्मणों ने शिवलिंग को स्थानांतरित कर दिया।

मंदिर की बनावट और महत्त्व

मंगेशी मंदिर की वास्तुकला विशेष है। यह मंदिर गोवा के ही एक अन्य मंदिर शांतादुर्गा मंदिर की शैली में बना है। माना जाता है कि ये मंदिर लगभग 450 साल पुराना है। इस मंदिर की संरचना सरल और शानदार है। मंदिर में कई गुंबद, स्तंभ और झरोखे हैं। यहां एक प्रमुख नंदी यानी बैल और मंदिर के मध्य में एक भव्य सात मंजिला दीपस्तंभ (दीपक टॉवर) है। मंदिर में एक शानदार पानी की टंकी भी है, जिसे मंदिर का सबसे पुराना हिस्सा माना जाता है। सभागृह एक विशाल हाल है, जिसमें लगभग 500 लोग खड़े हो सकते हैं। उन्नीसवीं शताब्दी के झूमर इस सभागृह की सजावट में शामिल हैं। सभागृह का मध्य भाग गर्भगृह की ओर जाता है, जहां भगवान मंगेश की प्रतिमा प्रतिष्ठित है। यहां सोमवार की पूजा के बाद मंदिर से पालकी पर प्रतिमा की यात्रा भी निकाली जाती है। माघ महीने में यहां जात्रोत्सव या यात्रोत्सव का आयोजन भी  होता है।

मंदिर का इतिहास

इतिहासकारों के मुताबिक मोंगरी पहाड़ी के बीच बना यह मंदिर 18वीं शताब्दी में बनाया गया था। वहीं धार्मिक मान्यता है कि एक बार शिवजी यहां बाघ के रूप में देवी पार्वती के सामने प्रकट हुए। देवी पार्वती उन्हें देखकर घबरा गईं और उनके मुंह से ‘रक्षाम गिरीश’ (मदद करो गिरिजापति) शब्द निकले। तभी से शिवजी मंगिरीश के नाम से मंगेशी मंदिर में पूजे जाने लगे। जानकारों के मुताबिक पुर्तगाली आक्रमण से मंदिर को बचाने के लिए शिवलिंग को मूल मंदिर से हटाकर प्रियोल के वर्तमान स्थल पर स्थानांतरित कर दिया। यह स्थानांतरण सन् 1560 में हुआ। सोंडे के राजा ने मंदिर परिसर के लिए भूमि दान दी। सन् 1973 में मंदिर के गुंबद पर स्वर्ण कलश की स्थापना की गई।

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