मछुआरों को तीन हजार भत्ता

बिलासपुर—प्रदेश के जलाशयों मंे कार्यरत 15 हजार 500 से ज्यादा मछुआरों को क्लोज सीजन के तहत तीन हजार रुपए का भत्ता प्रदान किया जाएगा। क्लोज सीजन के दौरान मछली के अवैध शिकार की रोकथाम के मद्देनजर फ्लाइंग स्क्वायड व अन्य टीमों की तैनाती कर दी गई है। इसके साथ ही फील्ड स्तर के स्टाफ की छुट्टियां भी रद कर दी गई हैं। इस बार विभाग जलाशयों में भारतीय मेजर कार्प और सिल्वर कार्प प्रजाति की मछली का 70 एमएम साइज का बीज संग्रहित करेगा। मत्स्य निदेशक सतपाल मेहता ने बताया कि प्रदेश के जलाशयों एवं सामान्य नदी नालों व उनकी सहायक नदियों में दस हजार पांच सौ से अधिक मछुआरे मछली पकड़कर अपनी रोजी रोटी कमाने में लगे हैं। वर्तमान में प्रदेश के पांच जलाशयों क्रमशः गोबिंदसागर, पौंग, चमेरा, कोलडैम एवं रणजीत सागर जलाशय जिनका क्षेत्रफल 43 हजार 785 हेक्टेयर के करीब है में 5000 से अधिक मछुआरे मछली पकड़ने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सामान्य जलाशयों (ट्राउट जलों के अतिरिक्त) जिनकी लंबाई दो हजार चार सौ किलोमीटर के लगभग है में पांच हजार आठ सौ से अधिक मछुआरे फेंकवां जाल के साथ मछली पकड़ने के कार्य में लगे हैं। सभी मछुआरा परिवारों को निरंतर मछली मिलती रहे तथा लागों को प्रोटीनयुक्त प्राणी आहार मछली के रूप में मिलता रहेए इसका दायित्व हिमाचल प्रदेश मत्स्य पालन विभाग का है।  उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी विभाग द्वारा पहली जून से 31 जुलाई तक बंद सीजन का कार्यान्वयन किया जा रहा है। इस अवधि में प्रदेश के सामान्य जलाशयों में किसी भी प्रकार के मछली शिकार पर पूर्णतः रोक रहेगी तथा इस अवधि के दौरान प्रदेश में मछली की विक्री पर भी पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा। उधर, प्रदेश के मत्स्यपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि बंद सीजन अवधि में प्रदेश के जलाशयों में कार्यरत मछुआरों को बंद सीजन राहत भत्ता योजना के अंतर्गत दो माह में तीन हजार रुपए प्रति मछुआरा सहायता राशि प्रदान की जायेगी। उन्होंने बताया कि इस तरह के 16 कैंप पौंग जलाशय में, गोबिंदसागर में 16 कैंप चमेरा में एक कैंप, रणजीत सागर डैम में एक व कोल डैम में तीन कैंप लगाए जाएंगे। विभाग के कर्मचारी इन कैंपों में रह कर दिनरात अवैध मत्स्य शिकार की रोकथाम हेतु गश्त करेंगे। कैंपों में इसके अतिरिक्त प्रत्येक जलाशय में उड़नदस्ता निदेशालय स्तर पर, एक राज्य स्तरीय उड़नदस्ता बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा मत्स्य धन संरक्षण के लिए इतने व्यापक प्रबंध इसलिए किए जा रहे हैं, ताकि इन जलों में कार्यरत मछुआरों को लगातार मछली मिलती रहे और वे इस व्यवसाय से अपने परिवार का जीवन यापन भली भांति कर सकें।

बंद सीजन में वेबसाइट के जरिए प्रचार

विभाग के निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य सतपाल मेहता ने  बताया कि विभाग अपनी वेबसाइट के माध्यम से भी आम जनमानस को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार प्रसार कर रहा है ताकि प्रदेश में आने वाले पर्यटक भी इससे जागरूक हो सकें। उन्होंने प्रदेश की जनता से आग्रह किया है कि मत्स्य बंद सीजन को सफल बनाने के लिए विभाग के कर्मचारियों का सहयोग करें।

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