मटौर-शिमला, पठानकोट-मंडी फोरलेन प्रोजेक्ट खतरे में

केंद्रीय सड़क मंत्रालय ने लो-प्रायोरिटी में डाली हिमाचल की दो सबसे बड़ी परियोजनाएं

 शिमला  —हिमाचल की दो सबसे बड़ी फोरलेन योजनाएं  मटौर-शिमला तथा पठानकोट-मंडी खतरे की जद में आ गई हैं। केंद्रीय परिवहन एवं भूतल मंत्रालय ने दोनों निर्माणाधीन परियोजनाएं लो-प्रायोरिटी में डाल दी हैं। इसके चलते इन सड़क परियोजनाओं के पिछले साल कॉल किए गए टेंडर रद्द हो सकते हैं। मंत्रालय ने फिलहाल हिमाचल की पहले से ही बन रही तीन परियोजनाओं का निर्माण काय हाई प्रायोरिटी पर करने को कहा है। इसके तहत मंत्रालय ने कड़ी शर्त लगाई है कि पहले पिंजौर-बद्दी-नालागढ़, कीरतपुर-मनाली तथा शिमला-चंडीगढ़ फोरलेन परियोजनाओं का निर्माण प्राथमिकता पर किया जाएगा। इसके बाद ही मटौर-शिमला और पठानकोट-मंडी के टेंडर खोले जाएंगे। इसके चलते प्रदेश सरकार ने केंद्र के हवाले की गई फोरलेन तथा नेशनल हाई-वे परियोजनाओं के रखरखाव का मामला प्रमुखता से उठाया है। सरकार ने प्रदेश के नेशनल हाई-वे के रखरखाव को अपने अधीन लेने का केंद्रीय मंत्रालय को प्रस्ताव दिया है। इसमें कहा गया है कि राज्य के 774 किलोमीटर नेशनल हाई-वे की हालत दयनीय है। इसके चलते केंद्रीय भूतल एवं सड़क मंत्रालय नेशनल हाई-वे के मेंटेनेंस के लिए डिपोजिट वर्क का प्रावधान करें। इस आधार पर प्रदेश सरकार डिपोजिट वर्क मिलने पर सभी नेशनल हाई-वे की मेंटेनेंस खुद करने को तैयार है। इस मुद्दे पर हिमाचल सरकार के मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रालय के सचिव संजीव रंजन के साथ अहम बैठक की थी। इस दौरान हिमाचल के नेशनल हाई-वे पर मुख्य सचिव ने मजबूती से पक्ष रखा था। उनका कहना था कि एनएचएआई अच्छी तरह और नियमित रूप से 774 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का रखरखाव नहीं कर रहा है। मुख्य रूप से राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में नियमित रखरखाव के लिए आवश्यक फील्ड स्टाफ व श्रमिकों की कमी के कारण यातायात के लिए सुरक्षित नहीं हैं और इसके कारण राज्य सरकार जनता, जनता के प्रतिनिधियों और मीडिया के सामने नाराजगी की स्थिति का सामना कर रही है। राज्य सरकार ने सुझाव दिया था कि इनकी रखरखाव गतिविधियों को राज्य लोक निर्माण विभाग के एनएच विंग को एनएचएआई के जमा कार्यों को डिपॉजिट वर्क्स के रूप में सौंपा जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्टेट पीडब्ल्यूडी के पास नियमित रखरखाव के लिए पर्याप्त फिल्ड जनशक्ति और बुनियादी ढांचा है।

क्या है स्टेटस

कीरतपुर-नेरचौक परियोजनाओं (84.38 किलोमीटर) के फोरलेनिंग का कार्य जून, 2018 से बंद पड़ा है। नेरचौक-पंडोह परियोजना (26.29 किलोमीटर) का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ फोरलेनिंग परियोजना के लिए 31.400 किलोमीटर की लंबाई (हिमाचल प्रदेश में 17.00 किलोमीटर) का निर्माण लटक गया है।

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