मनरेगा में 900 करोड़ रुपए का टारगेट

दिल्ली की बैठक में हिमाचल ने सौंपा एक्शन प्लान, जियो टैगिंग का सिलसिला जारी

शिमला – मनरेगा में हिमाचल प्रदेश इस वित्त वर्ष में भी 900 करोड़ की धनराशि लेगा। इसका टारगेट तय कर दिया गया है और इससे जुड़े एक्शन प्लान को केंद्रीय मंत्रालय को सौंप दिया गया है। हिमाचल इस साल में क्या-क्या काम करेगा और उससे ग्रामीण विकास के क्षेत्र में क्या कुछ होगा इस पर पूरा खाका सौंपा गया है। शुक्रवार को ही दिल्ली में इसे लेकर बैठक हुई है जिसमें अन्य मामलों के साथ मनरेगा पर भी मंथन किया गया। मनरेगा को केंद्र सरकार यूं ही आगे चलाती रहेगी और इसके माध्यम से जो काम किए जा रहे हैं, वे जारी रहेंगे। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से केंद्रीय योजनाओं पर किए जा रहे कार्यों से हुई प्रगति को लेकर समीक्षा की है। इसके साथ उन्होंने इस वित्त वर्ष की रणनीति पर भी विचार किया है। हिमाचल प्रदेश ने मनरेगा में बेहतरीन काम किया है। इसमें वर्क बढ़ने से यहां अधिक फायदा मिल रहा है। करीब 250 से ज्यादा अलग-अलग कार्य इसमें चिन्हित किए गए हैं, जिसका लाभ हिमाचल के ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहा है। मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूर भी इससे जुड़कर ही चल रहे हैं, जिसमें अब न तो कोई कमी आ रही है और न ही कोई बढ़ोतरी हो रही है। पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने यहां पर 900 करोड़ के काम किए हैं और यह धनराशि उसे केंद्र सरकार से हासिल भी हो चुकी है। इस साल भी 900 करोड़ ही हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके मुताबिक एक्शन प्लान बना है। मैटीरियल कंपोनेंट में पिछले साल समय पर पैसा जारी नहीं होने से थोड़ी दिक्कत उठानी पड़ी, लेकिन साल के अंत तक यह परेशानी भी दूर हो गई। दिल्ली में हुई बैठक में सभी राज्यों की समीक्षा हुई, जिसमें हिमाचल ने भी अपने काम बताए। हिमाचल प्रदेश के परफार्मेंस को सराहा गया, क्योंकि कभी हिमाचल को मनरेगा में केवल 450 या 500 करोड़ तक ही मिलते थे, लेकिन इससे बढ़कर अब 900 करोड़ रुपए तक ही राशि मिल रही है। इससे साफ है कि हिमाचल ने मनरेगा को ग्रामीण विकास में बेहतरीन तरीके से लागू किया है, जिसके लिए आगामी रणनीति बनाई जा चुकी है।

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