मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश देती लघुकथाएं

पुस्तक समीक्षा

* पुस्तक का नाम : तुम्हारे लिए (लघुकथा संग्रह)

  • लेखक का नाम  : कृष्णचंद्र महादेविया
  • प्रकाशक : पार्वती प्रकाशन, इंदौर

       मूल्य : 200 रुपए

प्रसिद्ध लेखक कृष्णचंद्र महादेविया का लघुकथा संग्रह ‘तुम्हारे लिए’ साहित्यिक बाजार में है। 128 पृष्ठों के इस लघुकथा संग्रह में जहां दो आलेख हैं, वहीं 81 लघुकथाएं भी पाठकों का मनोरंजन करने के साथ-साथ सामाजिक संदेश देती हैं। लेखक के बारे में डा. गंगाराम राजी लिखते हैं कि महादेविया जी ने अपनी लघुकथाओं में जीवन के हर क्षेत्र का स्पर्श किया और लघुकथा की मर्यादा को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। आपने अपनी कथाओं के बिंब व भाषा शक्ति से बहुत सटीकता के साथ आज हो रहे सामाजिक मूल्यों के ह्रास के प्रति चिंता व्यक्त की है, ग्रामीण पात्रों के जीवन का, निम्न मध्यवर्ग की बेचारगी, पीड़ा और निराशा का चित्रण प्रस्तुत करते हुए समाज के अंधविश्वासों, झूठी मान्यताओं पर भी प्रहार करने से चूके नहीं हैं। इनकी लघुकथाएं कथ्य, पात्र, चरित्र-चित्रण, संवाद के माध्यम से अपना निहित उद्देश्य प्राप्त करती हैं और ऐसे स्थान पर छोड़ देती है, जहां से पाठक के मंथन की यात्रा शुरू होती है। पुस्तक में पहला आलेख है सामाजिक विकृतियों से जूझती लघुकथाएं। इसमें पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर डा. अशोक भाटिया विषय का नीर-क्षीर विवेचन करते हैं। इसी तरह पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर डा. गंगाराम राजी ‘लघुकथा का रूप कृष्ण चंद्र महादेविया की कलम से’ नामक आलेख में महादेविया जी के लघुकथा स्वरूप का विवेचन करते हैं। अपना लहू, अछूत, अपना, अपनी, आत्म सम्मान, आदमियत, आम के आम, आदमियत नहीं मरती, उघड़ते रिश्ते, उसका निर्णय, ऊंची दुकान फीका पकवान, ओए, करीमुद्दीन की वापसी, कटोरा व कलाकार जैसी लघुकथाएं कोई न कोई सामाजिक संदेश सरल भाषा में देती लगती हैं। इसी तरह कितने संजय, कोरियर, कोमल मन, खिड़क का पेड़, खुजली, गॉड एंड डॉग, घुन, चश्मा, चूहे, चिंगारी, चौधरी, छवि, जमाई बाबू, जाति दंभ, डस्टबिन, ढहती दीवार, तिलचट्टे, तुम्हारे लिए, दादी जैसी, दुकानदारी, दूरी, दूध का कर्ज व देवता नाराज हो जाएंगे जैसी लघुकथाओं में विषयों की व्यापक विविधता है। साथ ही देवांगना, धर्म, नकल, नहीं वह मेरे जिले का नहीं, नीलम, प्लान, परिंदे, पर्यावरण प्रेमी, पहचान, पाखंडी, पालक, पिछले पहर का दर्द, प्रहार, पुण्य लाभ, फर्क, फिल्म, बस और नहीं, बकरा, बगुला भगत, बच्चे, बाज की आंख, बिल्लियां, बीज, बेआवाज, मर्द, महिला दिवस, मनरेगा टैंक, मां, मांग भरो सजना, मुलाकात, मैं ऐसी वैसी नहीं, मैं लड़की हूं न, लक्कड़बग्घे, वाऊचर, सवा शेर, स्टेशनरी, सासू मां, साथ-साथ अच्छा लगता है, सीता का रूमाल, संवाद, संवेदनहीन, शर्मा की घंटी तथा हंसना मना है जैसी लघुकथाएं रोचकता लिए हुए हैं। आशा है यह कथा संग्रह पाठकों को काफी पसंद आएगा, हालांकि कुछ लघु कथाएं लंबी हो गई हैं। 

                  -फीचर डेस्क

You might also like