मरीजों के लिए छोटा पड़ा हमीरपुर मेडिकल कालेज

हमीरपुर—डा. राधाकृष्णन मेडिकल कालेज के लिए बनने वाला 250 बैड का भवन शिलान्यास तक की सिमट गया है। लंबा अरसा पहले इसका शिलान्यास किया गया है। इसके बाद भवन निर्माण पर एक ईंट तक नहीं लगी। अब आलम यह है कि मेडिकल कालेज में डाक्टरों की भरमार है, लेकिन मरीजों के लिए अस्पताल छोटा पड़ा गया है। यही कारण है कि मेडिकल कालेज में अधिकतर बैड पर दो से तीन मरीज लेटे हुए देखे जाते हैं। वर्तमान में भी हालत ऐसे ही बने हुए हैं। मेडिकल कालेज बनने के बाद यहां उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। अस्पताल में हरेक विभाग का डाक्टर मौजूद है, लेकिन बैठने तक की सही व्यवस्था नहीं। व्यवस्था हो भी तो कैसे, यहां बनने वाले नए भवन के निर्माण पर एक ईंट तक नहीं लग सकी है। हालांकि यहां 250 बैड का भवन बनाने की योजना है। इसके लिए वकायदा शिलान्यास भी कर दिया गया है, लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हुआ। बताते चलें कि क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर को मेडिकल कालेज बनाया गया है। मेडिकल कालेज बनने के उपरांत यहां ओपीडी में दोगुना इजाफा हो गया। मरीजों को सुविधाएं प्रदान करने के लिए अस्पताल के भवन के साथ ही एक 250 बैड का भवन बनाने की योजना है। यह भवन मेडिकल कालेज का होगा तथा यहां मरीजों को भर्ती किया जाएगा। मेडिकल कालेज बनने के दौरान ही यहां भवन बनाने की योजना थी। मेडिकल कालेज बन गया तथा 100 से अधिक डाक्टर भी पहुंच गए, लेकिन भवन बनाना तो दूर इसके निर्माण पर एक ईंट भी आज तक नहीं लग पाई। ऐसे में लोगों के स्वास्थ्य को लेकर की जाने वाली बड़ी बड़ी बातों की भी यहां पोल खुल रही है। आलम यह है कि रोजाना सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल के बिस्तरों पर दो से तीन मरीजों को भी एक साथ रखकर उपचार देना पड़ रहा है। सूत्रांे की माने तो क्षेत्रीय अस्पताल में तो पूरे चिकित्सकों के बैठने की भी जगह तक नहीं है। मेडिकल कालेज बनने के उपरांत सौ से अधिक डाक्टर यहां पहुंचे हैं। हरेक बीमारी का विशेषज्ञ यहां उपलब्ध है, लेकिन भवन के आभाव में सुविधाओं का सही लाभ नहीं मिल पा रहा। मेडिकल कालेज प्रबंधन की माने तो भवन निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू करवाए जाने को लेकर कार्य किया जा रहा है। हालांकि भवन निर्माण कार्य के लिए बजट उपलब्ध है। बजट उपलब्ध होने के बावजूद कार्य शुरू न किया जाना समझ से परे है। फिलहाल जब तक 300 बैड के नए अस्पताल भवन का निर्माण नहीं होता, स्वास्थ्य सुविधाओं का आभाव ही रहेगा।

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