मां शूलिनी मेले में टूट सकती है परंपरा

विदेश दौरे के चलते मुख्यमंत्री शायद ही पहुंच पाएं मां की पालकी उठाने

सोलन  —राज्य स्तरीय मां शूलिनी मेले में कई दशकों से चली आ रही परंपरा टूट सकती है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अपनी व्यस्तता के चलते 21 जून को मेले के शुभारंभ पर मां शूलिनी की पालकी को कंधे पर  उठा नहीं पाएंगे। जानकारी के अनुसार इन्वेस्टर मीट के प्रस्तावित विदेश दौरे को लेकर मेले में शायद मुख्यमंत्री पहले दिन न पहुंच पाएं। मेले के अंतिम दिन उनके आने की संभावना फिलहाल बरकरार है।  शूलिनी मेले की परंपरा रही है कि मां शूलिनी की पालकी को प्रदेश का मुख्यमंत्री कंधे पर उठाते हैं तथा उन्हें आशीर्वाद मिलता है। उसी समय से मेले का शुभारंभ समझा जाता है, किंतु इस बार शायद इस रीत का निर्वहन न हो पाए। तीन दिवसीय राज्य स्तरीय मेले के आयोजन के लिए सोमवार को सोलन में सामाजिक न्याय व अधिकारिता एवं सहकारिता मंत्री डा. राजीव सहजल की अध्यक्षता में एक बैठक बुलाई गई थी। इस बार मेले में बालीवुड के साथ-साथ शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, भजन संध्या इत्यादि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि हमने मेलों को आकर्षक व प्राचीन संस्कृति को परोसने के लिए कुछ भी खास नहीं किया। उन्होंने इसी वर्ष से इसमें बदलाव करने के जिला प्रशासन को निर्देश जारी कर दिए। बैठक में निर्णंय लिया गया कि कुश्ती का प्रारूप इस बार मैट व मिट्टी दोनों का होगा तथा दोनों प्रारूप में कुश्ती लड़ाई जाएगी। पैट शो में इस बार सिर्फ डॉग ही नहीं, अपितु देसी गाय की नस्लें व गोवंश पर देश में हो रहे व्यापक शोध को भी दर्शाया जाएगा।

पुजारियों ने चौंकाया

मां शूलिनी के पुजारियों ने प्रशासन व बैठक में उपस्थित मंत्री डा. राजीव सहजल के समक्ष घोषणा कर सोलनवासियों को चौंका दिया है। बैठक में एक पुजारी ने कहा कि उन सबका अंतिम मेला होगा। क्योंकि मेले के सरकारीकरण के बाद आज तक मां भगवती के पुजारियों को कुछ नहीं मिलता है। मां की सेवा वह इस दफा अंतिम बार करेंगे।

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