मानवता के सिपाही

जेन कहानियां

युद्ध के दिनों में कुछ सैनय अधिकारी जेन गुरु गासन के आश्रम में आ रुके। गासन ने आश्रम के रसोइए को बुला कर कहा, इन्हें वहीं खाना परोसना जो आश्रम में रहने वाले सब लोग खाते हैं।

खाना परोसा गया, तो अधिकारियों को गुस्सा आ गया। वे तो किसी और ही आवभगत के अभ्यस्त थे। सब की तरफ से एक अधिकारी जेन गुरु गासन के पास गया, आप नहीं जानते कि हम कौन हैं?

हम सिपाही हैं, देश पर अपना जीवन न्योछावर करते हैं। आप हमारे साथ उसी तरह पेश क्यों नहीं आते?

गासन ने पलट कर पूछा, आप नहीं जानते कि हम कौन हैं? हम भी मानवता के सिपाही हैं। हमारा लक्ष्य जीवन मात्र की रक्षा करना है।

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