मिड हिमालयन प्रोजेक्ट में 300 करोड़ का घोटाला

विजिलेंस को सौंपी जांच, धांधली पर एफआईआर की तैयारी

शिमला –जयराम सरकार ने मिड हिमालयन प्रोजेक्ट का मामला स्टेट विजिलेंस एंड एंटी क्रप्शन ब्यूरो को भेज दिया है। वर्ष 2013-17 के बीच दूसरे चरण में इस प्रोजेक्ट पर खर्च 300 करोड़ की राशि की जांच के लिए विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वन विभाग की जांच के बाद विजिलेंस को भेजे गए इस केस में पूर्व वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा वन विभाग के 21 आईएफएस व एचएफएस अधिकारियों पर विजिलेंस का शिकंजा कसना तय है। बताते चलें कि भारतीय जनता पार्टी की वीरभद्र सरकार के खिलाफ राज्यपाल को सौंपी गई चार्जशीट में वन विभाग के तथाकथित घोटाले प्रमुखता से शामिल किए गए थे। इसमें पूर्व वन मंत्री के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की गई थी। कहा गया था कि वीरभद्र सरकार के कार्यकाल में वन विभाग में टॉप टू बॉटम जमकर धांधलियां हुई हैं। इसमें सात अलग-अलग मामलों में चार्जशीट में आरोप लगाए गए हैं। इसी कड़ी में मिड हिमालयन प्रोजेक्ट का हवाला देते हुए कहा था कि इस परियोजना में 300 करोड़ की धांधली हुई है। चार्जशीट में कहा गया है कि मिड हिमालयन प्रोजेक्ट का पहला चरण वर्ष 2006 से लेकर 2012 तक चला। इस दौरान करीब साढ़े तीन करोड़ के परियोजना के तहत चिन्हित क्षेत्रों में कार्य हुए। वीरभद्र सरकार में इस परियोजना के लिए चरण-दो में करीब 300 करोड़ और जारी हुए। मौके पर इस परियोजना का निर्माण कार्य नहीं हुआ और राशि का गबन हुआ है। भाजपा की चार्जशीट में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए जयराम सरकार ने यह मामला संबंधित विभागों को सत्ता में काबिज होने के तुरंत बाद भेजा था। लिहाजा डेढ़ साल की जांच के बाद विभागीय जांच पूरी कर वन विभाग ने मिड हिमालयन परियोजना में विजिलेंस को केस दर्ज करने की सिफारिश की है।

नम्होल-स्वारघाट में डकारे लाखों: मिड हिमालयन परियोजना के तहत प्रदेश भर में 10 डिवीजन स्थापित किए थे। विभागीय जांच में पुष्टि हुई है कि निर्माण कार्यों के लिए आयोजित की गई टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। नम्होल तथा स्वारघाट डिवीजन में करोड़ों के निर्माण कार्य फर्जी टेंडर प्रक्रिया पर आबंटित किए गए। विभागीय जांच में कहा गया है कि इन दोनों डिवीजनों में मौके पर हुए निर्माण कार्य में भी गड़बड़ी है।

मुसीबत में 21 आला अफसर::विजिलेंस में पहुंचे केस के बाद वन विभाग के 21 आला अफसर सीधे-सीधे जांच के दायरे में आ गए हैं। परियोजना में तैनात रहे चीफ प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर, रिजनल डायरेक्टर तथा सभी 10 डिवीजनों के वाटरशेड डिवेल्पमेंट अफसर विजिलेंस की राडार में आ गए हैं। प्रत्येक डिवीजन में डीएफओ रैंक का अधिकारी तैनात किया गया था।

भेड़ पालकों के नाम पर किट खरीद फर्जीबाड़ा: मिड हिमालयन परियोजना के तहत भेड़पालकों के नाम पर महंगे चश्मे, बूट, रेन कोट तथा किट का दूसरा सामान खरीदा गया। विभागीय जांच ने इस खरीद पर भारी आपत्ति दर्शायी है। जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ जगह किट बांटी ही नहीं है, लेकिन परियोजना में खर्चा दर्शाया हुआ है। भेड़पालकों को वितरित की गई किट वास्तविक लागत से कई गुणा अधिक दर्शाई गई है।

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