मृत्युंजय जप कैसे करें

अब यंत्र प्रकरण कहते हैं। प्रथम वंध्यायंत्र। हे देवी, यंत्र धारण विधान सुनो। यंत्र के धारण मात्र से ही समस्त वांछित फल प्राप्त हो जाते हैं। जन्मवंध्या स्त्री पुत्र को प्राप्त करती है। गोरोचनादि सुगंधित पदार्थों से उत्तम यंत्र को लिखें। दो वृत्त निर्माण कर अष्टदल कमल बनाकर प्रतिपद्यमे मायाबीज और भूपुर लिखें। हे महेश्वरी, भोजपत्र के ऊपर लिख कर इस यंत्र को धारण करें तो वंध्या स्त्री भी पुत्रवती हो। इस प्रयोग की समाप्ति कर गुरु जी को दक्षिणा दें…

-गतांक से आगे…

अब यंत्र प्रकरण कहते हैं। प्रथम वंध्यायंत्र। हे देवी, यंत्र धारण विधान सुनो। यंत्र के धारण मात्र से ही समस्त वांछित फल प्राप्त हो जाते हैं। जन्मवंध्या स्त्री पुत्र को प्राप्त करती है। गोरोचनादि सुगंधित पदार्थों से उत्तम यंत्र को लिखें। दो वृत्त निर्माण कर अष्टदल कमल बनाकर प्रतिपद्यमे मायाबीज और भूपुर लिखें। हे महेश्वरी, भोजपत्र के ऊपर लिख कर इस यंत्र को धारण करें तो वंध्या स्त्री भी पुत्रवती हो। इस प्रयोग की समाप्ति कर गुरु जी को दक्षिणा दें।

वृत्त चतुर्दलं पद्यं भूपुरेण समन्वितम।। वृत्तमध्ये लिखद्देवि साधकाख्यां विशेषतः।। पुत्रवतीपदं पश्चात भवत्विति पदं ततः। प्रणवैः पुटिता लज्जा त्रिधा पत्रेषु संलिखेत।। पूर्ववत्यपूजयेद्देविधारयेद्दक्षिणे भुजे। सत्यं हि दिवेशि चंध्या पुत्रवती भवेत। दुर्भागा चेभ्यद्रवेन्नारी सुभगा मास्तो भवेत।।

वृत्तचतुर्दलपद्य भूपुरयुक्त निर्माण करें। हे देवि, वृत्त के मध्य में साधक के नाम को लिखें और पुत्रवती भवतु, इस पद को लिखें। (उदाहरणार्थ) रमा पुत्रवती भवतु इस उदाहरण के अनुसार लिखें, फिर प्रणवपुटित लज्जा बीज तीन प्रकार के पत्रों में लिखें। हे देवि, यह बात सत्य है कि इसके धारण करने से वंध्या पुत्रवती होती है। दुर्भागा स्त्री एक मास के भीतर सौभाग्यवती हो जाती है।

रक्षायंत्रम

अतः परं प्रवक्ष्यामि महारक्षाकरं परम् धारणाद्दानवतिर्महारक्षाकरो भवेत। पंचकं सर्वमध्ये लिखित्वा धारयेद्यदि।। न तस्य पुत्रभीतिः स्यातत्र रक्षाकरोहरः। गोरोचकाकुंकमाभ्यां भूर्जे संलिख्य धारयेत।। तत्र पूजां महादेवि गणपस्य समाचरेत। पूजितं धरतिंचैव सर्वोपद्रवनाशनम्।। वृत्तमष्टदलं पद्यं पुनः पद्योषु संलिखेत। गोरोचनाभिः संलिख्य धारयेत्परमेश्वरि।। उक्तेरूपेण लिंगस्य पूजां कृत्वां महेश्वरि।। धारयेद्यो भवेतस्य ह्रापमृत्युविनाशनम्।।

अब महारक्षाकर यंत्र कहते हैं जिसके धारण करने से दैत्येश्वर भी रक्षा करने वाला हो जाता है। हे देवि, पंचदल कमल लिखकर पूजन करके धारण करे तो पुत्रभय कदापि न हो, किंतु शिवजी महाराज स्वयं आकर रक्षा करेंगे। भोजपत्र के ऊपर गोरोचन और कुमकुम से लिखकर गणपति का पूजन कर यंत्र धारण करे ते समस्त उपद्रव दूर हों और पुत्र की प्राप्ति हो।

You might also like