मृत्युंजय जप कैसे करें

Jun 8th, 2019 12:05 am

वृत्त अष्टदल कमल के प्रतिदल में ला बीज लिखें। हे परमेश्वरि, गोराचनादि सुगंधित पदार्थों से लिखकर धारण करने से पुत्र प्राप्ति होती है। हे महेश्वरि, उक्त विधान के अनुसार यंत्र का पूजन करें। हे देवि, पूजन और यंत्र के धारण करने से अल्पमृत्यु दूर होती है। अब पुत्र उत्पन्न करने वाला यंत्र कहते हैं। बिंदुवृत्त को लिखकर अष्टदल कमल लिखें और उक्त कमल दल के प्रितिदल में पृथक-पृथक यंवीज को लिखें। हे देवी, पूर्ववत पूजन कर धारण करे तो मृत्यु से भय न हो। काकवंध्या स्त्री बहुपुत्र प्राप्त करे। षट्कोण वृत्त लिखकर पुनः अष्टदल लिखें और छहों कोणों में बीज मंत्र लिखें…

-गतांक से आगे…

वृत्त अष्टदल कमल के प्रतिदल में ला बीज लिखें। हे परमेश्वरि, गोराचनादि सुगंधित पदार्थों से लिखकर धारण करने से पुत्र प्राप्ति होती है। हे महेश्वरि, उक्त विधान के अनुसार यंत्र का पूजन करें। हे देवि, पूजन और यंत्र के धारण करने से अल्पमृत्यु दूर होती है।

पुत्रजननयंत्रम

बिंदुवृत्तं समालिख्य लिखेदष्टदलं ततः। प्रतिपत्रेषु यंबीजं लिखेदथ पृथक्पृथक।। पूर्ववत्यपूज्येद्देवि धारणान्मृ त्पुनाशनम। काकवंध्याजनस्यापि बहंदत्रकरं परम।। षट्कोणं विलिखेद्वृत्ततश्चाष्टदलं लिखेत। षटकोणेशु च षट् दीर्घान विलिखेत्परमेश्वरि। ऐं हृं ओउम हृं फट् स्वाहा लिखेदष्टदले ततः। सर्वमध्ये लिखिद्देवि ततः श्रृणु महेश्वरि।। प्रणवस्तु ततो माया साधकाख्यं तु डेंतकम। सुपुत्रअंज समालिख्य उत्पादय पदंततः।। विधाय चैवं विधिवद्धारयेद्यंत्रमुत्तमम्। धारणात्सर्वसंपत्तिर्भवेद्देवि न संशयः। पूजनं पूर्वमुक्तिम। देवीं कालीमंत्रेण पूजयेत्।

अब पुत्र उत्पन्न करने वाला यंत्र कहते हैं। बिंदुवृत्त को लिखकर अष्टदल कमल लिखें और उक्त कमल दल के प्रितिदल में पृथक-पृथक यंवीज को लिखें। हे देवी, पूर्ववत पूजन कर धारण करे तो मृत्यु से भय न हो। काकवंध्या स्त्री बहुपुत्र प्राप्त करे। षट्कोण वृत्त लिखकर पुनः अष्टदल लिखें और छहों कोणों में बीज मंत्र लिखें। ऐं हीं ओउम ऐं ही फट् स्वाहा-इनको अष्टदल में लिखें। यंत्र के मध्य में प्रणव, मायाबीज साधक का नाम ‘सुपुत्र उत्पादय’ इन पदों की योजना कर सविभक्तिक लिखें। विधिपूर्वक इस उत्तम यंत्र को धारण करें। हे देवि, यंत्र धारण करने से समस्त संपत्ति प्राप्त होती है, इसमें किसी प्रकार का संदेह नहीं है। इसका पूजनविधान प्रथम कहे गए हैं। देवी जी का पूजन काली के मंत्र से करना चाहिए।

डाकिन्यादिभयविनाशनयंत्र जवीवत्यासंत्र च वृत्तयुग्मं लिखेत्तत्र महाबीजचतुष्टम। चतुष्कोणद्वयं बाह्यो लिखित्वा धारयेद्ददि। नाशयेत्क्षणमात्रेण डाकिन्यादिभवं भयम। मृतवत्सा यदि भवेन्नारी दुखपरायणा। धारयेत परमं यंत्रं जीववत्सा ततेभवेत।

अब डाकिनी आदि भयनाशक तथा जीववत्सायंत्र वर्णन करते हैं। दो वृत्त लिखकर चारों कोनों में चार महाबीज लिखें और पूजन कर धारण करें तो डाकिनी आदि का भय दूर हो जाता है।

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या आपको सरकार की तरफ से मुफ्त मास्क और सेनेटाइजर मिले हैं?

View Results

Loading ... Loading ...


Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV Divya Himachal Miss Himachal Himachal Ki Awaz