युद्ध संग्रहालय में सजा ‘दीपक’

धर्मशाला—धर्मशाला में प्रदेश के पहले युद्ध संग्रहालय के प्रांगण में भारतीय वायु सेना का एयक्राफ्ट दीपक चार चांद लगा रहा है। अब देश व दुनिया से धर्मशाला पहुंचने वाले पर्यटक बेसिक ट्रेनिंग के लिए प्रसिद्ध एयरक्राफ्ट एचपीटी 32 को नजदीक से देख सकेंगे और साथ ही इसके बारे में अधिक जानकारी भी जुटा पाएंगे। अगले माह से युद्ध संग्रहालय में लटके ताले भी हट जाएंगे और देश-विदेश के पर्यटक भारतीय सेना को नजदीक से जान पाएंगे। शुक्रवार को भारतीय वायु सेना के 41 रिपयेर व सालविंग यूनिट अंबाला के इंजीनियरों ने तकनीकी कार्य के साथ युद्ध संग्रहालय में एयरकाफ्ट को प्रदर्शित करने का कार्य पूरा कर लिया गया है। अब अगामी कुछेक दिनों में इसके आसपास सजो सजा का कार्य होगा। संग्रहालय में जो एयरक्राफ्ट प्रदर्शित किया गया है, उसमें 1977 से लेकर 2009 तक बेसिक ट्रेनिंग दी जाती रही है। इस अवधि के बीच के सभी पायलटों ने जहाज उड़ाने की शुरुआत इसी जहाज से की है। एचपीटी 32 हिंदोस्तान एयरोनेटिक लिमिटेड कानपुर द्वारा तैयार किए गए इस जहाज ने पहली बार जनवरी, 1977 में भारतीय वायु सेना के तहत उड़ान भरी थी। धर्मशाला युद्ध संग्रहालय में सजे इस जहाज का बजन करीब एक टन है। इजीनियरिंग विंग के लेफ्टिनेंट यशस्वी की अगवाई में इस जहाज को निर्धारित स्थान पर फिट किया है। उन्होंने बताया कि जहाज को फिट करने का कार्य पूरा कर लिया गया है। अब इंजीनयरिंग विंग का कार्य पूरा है। ब्रगेडियर एससी पाठक ने बताया कि वायु सेना के इंजीनियरिंग के कार्य पूरा कर लिया है। अब संग्रहालय में इसके पिल्लरों व अन्य जगहों पर सजो सजा का कार्य पूरा कर संग्रहालय को जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहली जुलाई से सुरक्षा स्टाफ तैनात कर दिया जाएगा, जिसके बाद संग्रहालय में रखे जाने वाले हथियार रखे जाएंगे और पर्यटकों के लिए संग्रहालय खोल दिया जाएगा।a

You might also like