योग, स्वास्थ्य और पर्यटन

– विपिन शर्मा, चंबा

आज विश्व पटल पर एक खास दिन ‘सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे संतु निरामयाः’ की मूल भावना के साथ सातों महाद्वीपों के लगभग सभी देशों में पांचवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है और ‘योग’ भी मनुष्य को  स्वस्थ लंबा जीवन प्रदान करता है। योग से धार्मिक आधार पर फायदा या नुकसान होता हो या योग से हिंदुओं के स्वास्थ्य को लाभ और मुसलमानों के स्वास्थ्य को नुकसान होता हो, तो ऐसा कोई घोर रूढि़वादी या दुराग्रही व्यक्ति भी दावा नहीं कर सकता। योग सभी के लिए है। योग का कोई धर्म नहीं होता। यह एक स्वस्थ शारीरिक अभ्यास की प्रक्रिया है, जो हर किसी से जुड़ी है। यह अच्छी बात है कि भारत सहित दुनिया के सभी देशों में लोगों ने ऐसी संकीर्ण सोच को नकार कर योग को खुले दिल से अपना लिया है।  आज प्रदेश में योग लोगों की लाइफ स्टाइल का हिस्सा बन चुका है। इसके साथ  ही जरूरत इस बात की है कि प्रदेश में योग शिक्षा और प्रचार-प्रसार की ऐसी सरकारी नीति बने, जिससे प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य लाभ के अतिरिक्त योग प्रदेश की आर्थिकी को भी मजबूत करने का एक सुदृढ़ माध्यम बन सके। योग को धार्मिक व स्वास्थ्य पर्यटन दोनों के साथ जोड़ा जा सकता है। क्यों न ऐसी योग नीति बने, जिससे बेरोजगार युवा व्यावसायिक कोर्स व स्किल इंडिया के अंतर्गत योग सीखें, योगाभ्यास में प्रवीणता हासिल करें तथा योग प्रशिक्षण और योग द्वारा फिजियोथैरेपी से रोगों के निदान को प्रोफेशनल तरीके से अपना कर करियर बनाएं। सरकार निजी क्षेत्र को इसमें शामिल कर सकती है। देश व प्रदेश में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर योग और प्राकृतिक  चिकित्सा केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं। केरल में पारंपरिक रूप से योग आधारित प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत अच्छा  कार्य हो रहा है। इसी तर्ज पर अगर हिमाचल में भी सरकारी स्तर पर दीर्घकालीन नीति बनाकर गंभीरता से प्रयास किए जाएं, तो  प्रकृति प्रदत्त विशेषताओं तथा स्वच्छ वातावरण होने के कारण प्रदेश योग व प्राकृतिक चिकित्सा का ‘हब’ बन सकता है। योग किसी धर्म, जाति, समाज या पार्टी विशेष का नहीं है, बल्कि सबका है। योग सब के लिए है, सब के भले के लिए है।

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