राजगढ़ में दर्जनों जंगल जलकर राख

राजगढ़—क्षेत्र के दर्जनों जंगल इस समय पूरी तरह जलकर राख हो चुके हैं। इस आग से जहां ग्रामीणों की कृषि आधार चीड़ की पत्तियां जल गई हैं, वहीं जंगल में आवासित जीव जंतु, चरागाह में चरते पशु एवं जंगली जड़ी-बूटियां भी आग की चपेट में आ गई हैं। इसी कड़ी में शनिवार को धार-बघेड़ा, थैना-बसौतरी एवं चब्यूल के जंगलों में लगी आग से भारी नुकसान होने के समाचार हैं। जानकारी के अनुसार जहां चबियुल के यशपाल के आड़ू के बागीचे में लगभग 60-70 पौधे जल गए, वहीं नरेश एवं दुर्गा सिंह का एक-एक घोड़ा जो जंगल में चर रहे थे भी जंगल की आग का शिकार बन गए। साथ ही रमेश की गोशाला, आंशिक पंचायत भवन थैना-बसौतरी, स्कूल की टैंकी के अतिरिक्त हजारों की संख्या में खड़े पेड़ भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। वैसे तो राजगढ़ क्षेत्र में हर तरफ जंगलों में आग है, लेकिन शनिवार को इस क्षेत्र में जंगल में आगजनी की यह सबसे बड़ी घटना है। प्रदेश सरकार गर्मियों से पहले जंगलों में आग पर काबू पाने का अलाप रटती है वह मिथ्या साबित हो रही है। क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमी एवं वन मंत्री से सम्मानित पर्यावरणविद शेरजंग चौहान ने जंगलों को आग से बचाने के लिए सरकार, वन विभाग, साझा वन प्रबंधन समितियां और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा मिलकर कोई ठोस समाधान निकालने की बात कही।

क्या कहते हैं वनमंडलाधिकारी मृत्युंजय माधव

इसी प्रकार आग लगने की घटनाओं से बचने के लिए वन विभाग राजगढ़ ने क्या कदम उठाए हैं के बारे में वनमंडलाधिकारी आईएफएस मृत्युंजय माधव ने बताया कि जंगलों में लगने वाली आग से पहले और बाद में सरकार द्वारा उपलब्ध सभी इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विभागीय प्रबंधन के अतिरिक्त अन्य जरूरी उपकरणों की सूची विभाग को भेज दी गई है, ताकि आग पर जल्दी काबू पाया जा सके।

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