राजधानी में जय भवानी, जय शिवाजी

 शिमला—राजधानी शिमला में ग्रीष्मोत्सव का अंतिम दिन बड़ा खास रहा। दोपहर करीब तीन बजे एपीजी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले अलग – अलग देशों के छात्रों ने अपनी संस्कृति पोशाक व गानों के माध्यम से दर्शाई, तो वहीं दूसरे देशों व राज्यों से आए कलाकारों ने भी अपनी संस्कृति की झलक परेड के माध्यम से शिमला का बताई। दरअसल जिला प्रशासन ने ग्रीष्मोत्सव के तहत भव्य सांस्कृतिक परेड का आयोजन किया हुआ था। इस परेड में हजारोंं की तदाद में छात्रों व कलाकारों ने भाग लेकर लोगों का खुब मनोरंजन किया। परेड के दौरान लोगों ने नृत्य व एक से बढ़कर एक गाने भी गाए। बता दें कि यह पहला मौका था जब अतंराष्ट्रीय समर फेस्टिवल के बीच भव्य सांस्कृतिक परेड का आयोजन किया गया हो। शिमला में आयोजित भव्य सांस्कृतिक परेड में जय भवानी, जय शिवाजी के नारों ओर पायलों की खनक से हिल्स क्वीन शिमला का माहौल देखेते ही बनता था। शिमला के एपीजी विश्वविद्यालय से आए सैकड़ों छात्रों ने भव्य सांस्कृतिक परेड में भाग लेकर सभी देशों के आम जन को मिलजुलकर रहने  का संदेश दिया। इस परेड में अफगानिस्तान, तंजानिया, टोगो व अन्य देशों  से  भी आए लोगों ने अपने अपने देशों कि वेशभूषा पहनकर कर अपनी परंपरा का बखान किया। तिबेतियन इंस्टीच्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स द्वारा पारंपरिक तिब्बती और मुखोटा नृत्य प्रस्तुत किया गया। ऑल इंडिया आर्टिस्ट ऐसोसिएशन के कलाकारों द्वारा मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल बिहार और  उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति का परेड में प्रदर्शन किया गया। उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र पटियाला द्वारा शिमला ग्रीष्मोत्सव में आमंत्रित जम्मू कश्मीर असम तेलंगाना मध्य प्रदेश, पंजाब चंडीगढ़ तथा हरियाणा के विभिन्न नृत्य दलों ने भी परेड में विविध संस्कृति के रंग बिखेरे।

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