राज्यपाल बोले, पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है यज्ञ का महत्व

शिमला—राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्रेम, शांति और प्राकृतिक संरक्षण हमारी संस्कृति के अभिन्न अंग रहे हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने यज्ञ को प्राकृतिक स्वच्छता के लिए महत्वपूर्ण और अनिवार्य कहा है, जिसे आज हम छोड़ चुके हैं। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय ऋषियों ने पर्यावरण संरक्षण और शांति के चिंतन से वर्षों पूर्व ही मानव को अवगत करवा दिया था। हमारी संस्कृति के अभिन्न अंग वेद हर मंत्र शांति से ही आरंभ होता है, लेकिन मौजूदा परिप्रेक्ष्य में भोगवादी संस्कृति ने पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। विकास के बावजूद हम अपने ऋषि-मुनियों के दिखाए मार्ग और चिंतन तक नहीं पहुंच पाए हैं। आज हम वैश्विक उष्मीकरण से चिंतित हैं। आचार्य देवव्रत ने कहा कि इस मौके पर प्राकृतिक कृषि को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस कार्यक्त्रम के आयोजक सोका गक्कई इंटरनेशनल और भारत सोका गक्कई के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य के पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रदेश भर में एक दिन में करीब 11 लाख पौधारोपण करने पर योजना तैयार की जा रही है, जिसे शीघ्र ही कार्यान्वित किया जाएगा। पर्यावरण की रक्षा और इसके सुधार के लिए व्यक्तिगत प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करते हुए यह प्रदर्शनी दर्शकों को उनकी असमर्थता व बेबसी को भावना को दूर करने के लिए भी प्रोत्साहित करती है। प्रदर्शनी के माध्यम से बताने की कोशिश की गई है कि स्थितरता न केवल पर्यावरण की रक्षा से जुड़ी है बल्कि सामाजिक न्याय और शांति को भी सुनिश्चित बनाती है। इसके बाद राज्यपाल ने प्रदर्शनी का उद्घाटन कर इसका अवलोकन किया। इस अवसर पर विशेष अतिथि के तौर पर आए नागालैंड के पूर्व राज्यपाल डॉ. अश्वनी कुमार ने सतत विकास के विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित करने के लिए भारत सोका गक्कई के प्रयासों की सराहना की और इस विषय में अपने अनुभवों के साथ विस्तार से चर्चा की। भारत सोका गाकाई की राष्ट्रीय नेता श्रीमती सुजाता मनकोटिया ने राज्यपाल व अन्य अतिथियों का स्वागत किया और प्रदर्शनी से संबंधित तथ्यों की जानकारी दी। भारत सोका गाकाई की हिमाचल अंचल की नेता अनूप सूद ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। राज्यपाल के सलाहकार डॉ. शशीकांत शर्मा, भारत सोका गाकाई के हिमाचल अंचल के नेता श्री शरब नेगी  तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित रहे।

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