राज्य स्तरीय शूलिनी मेले को बाजार लगे सजने

सोलन —राज्य स्तरीय शूलिनी मेले के लिए सोलन शहर सजना शुरू हो गया है। आलम यह है कि शहर के व्यापारियों ने रंग-बिरंगी लाइटों से बाजार को दुल्हन की तरह सजा दिया है। शहर के अलावा अन्य जगहों पर भी रंग-बिरंगी लाइटें लगनी शुरू हो गई है। यही नहीं मेले से पूर्व ही बाहरी राज्यों के कारोबारियों ने भी सोलन में डेरा डालना शुरू कर दिया है। शूलिनी मेले की खासबात यह है कि तीन दिन तक चलने वाले इस मेले में लाखों की संख्या में लोग सोलन पहुंचते है। यही नहीं जो लोग सोलन से बाहर देश विदेश में भी रहते है वे भी अपनी अधिष्ठात्री देवी के दर्शन के लिए यहां पहुंचते है।  दूसरी ओर जिला प्रशासन भी मेले की तैयारियों में जुटा हुआ है और तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों में भी मेले को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। इस वर्ष मेले को लेकर खासी चहल-पहल देखने को मिल रही है। शहर के बाजारों में भी लाइटों की लडि़यां को लगाने का कार्य सोमवार को भी जारी रहा।  मां शूलिनी मंदिर व ठोडो मैदान में स्थित शूलिनी मंच को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने के लिए ठोडो मैदान में सिटिंग प्लान भी तैयार किया जा रहा है। अनुमान है कि मेले के दौरान ठोडो मैदान में तीन हजार कुर्सियां दर्शकों के लिए लगाई जाएंगी। इसके अलावा वीवीआइपी के लिए 150 व वीआइपी के लिए 200 कुर्सियां लगेंगी। इसके अलावा खरीदारी के लिए दर्जनों स्टाल भी मेले में स्थापित किए जाएंगे।

200 साल से मनाया जा रहा है शूलिनी मेला

मां शूलिनी मेला लगभग 200 साल से मनाया जा रहा है। मां शूलिनी मंदिर के पुजारी पंडित राम स्वरूप शर्मा ने बताया कि यह मेला लगभग 200 साल से मनाया जा रहा है। इस मेले का इतिहास बघाट रियासत से जुड़ा हैं। सोलन का नाम मां शूलिनी के नाम पर ही पड़ा है। यह मेला हर साल जून माह में मनाया जाता है। इस दौरान मां शूलिनी शहर के भ्रमण पर निकलती हैं व वापसी में अपनी बहन के पास दो दिन के लिए ठहरती हैं। इसके बाद अपने मंदिर स्थान पर वापस पहुंचती हैं, इसलिए इस मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान शहर भर में भंडारों का आयोजन भी किया जाता है।

तीन दिन तक माल रोड पर वाहनों की नो एंट्री

शूलिनी मेले में जुटने वाली भारी भीड़ के लिए प्रशासन द्वारा माल रोड को वाहनों के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।

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