रिवालसर में प्रशासन के आदेशों को ठेंगा

रिवालसर—रिवालसर में आजकल प्रदेश सहित अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटकों की भरमार होने से यहां का पर्यटन व्यवसाय तो फल फूल रहा है, मगर चंद दुकानदार अपने निजी फायदे के लिए धर्म का हवाला देकर पर्यटकों को गुमराह कर उन्हें रिवालसर की पवित्र झील में फिश फीडिंग करने को प्रेरित कर रहे हैं, जिस कारण झील में फिर से फिश फीडिंग के नाम पर टनों के हिसाब से बिस्किट सहित अन्य खाद्य सामग्री पवित्र झील में समा रही है, जो न तो झील की सेहत के लिए अच्छी है और न ही मछलियों के लिए। हालांकि झील में खाद्य सामग्री डालने पर पूर्ण प्रतिबंध है। बावजूद यह सब होता देख यहां का स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। झील बचाने में जुटी क्षेत्र की स्वयंसेवी संस्था डीएजी के निदेशक नरेश शर्मा, अध्यक्ष अजय कुमार सहित दर्जनों पर्यावरण प्रेमी लोगों का कहना है कि फिश फीडिंग को रोकने के लिए प्रशासन का गंभीर न होना चिंता का विषय है। प्रशासन के उदासीन रवैए के कारण झील संकट के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि झील में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को नजर अंदाज किया जा रहा है और रोकथाम को लेकर केवल कागजों पर ही लकीरें ही खींची जा रही हैं। नतीजा अप्रैल, 2018 में तत्कालीन एसडीएम द्वारा मछलियों के लिए फीडिंग की रोकथाम को लेकर जारी की गई अधिसूचना का कोई असर नहीं हुआ है। उन्होंने डीसी मंडी से मांग करते हुए कहा है कि झील में खाद्य सामग्री डालने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान करते हुए उन पर नकेल कसी जाए। नगर पंचायत अध्यक्ष लाभ सिंह ठाकुर का कहना है कि झील में खाद्य पदार्थ डालने वालों पर लगाम कसी जाएगी। नायब तहसीलदार रिवालसर किशोर चंद ने कहा है कि सरकारी आदेशों का उल्लंघन करने वालों के  विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी लोगों से अपील करते हुये कहा है कि झील में मछलियों को खाद्य पदार्थ न डालें।

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