लोकलुभावन ताकतों के खिलाफ खड़ी हो न्यायपालिका

नई दिल्ली – प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने स्वतंत्रता को न्यायपालिका की आत्मा बताते हुए कहा है कि उसे लोकलुभावन ताकतों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए और संवैधानिक मूल्यों का अनादर किए जाने से इसकी रक्षा की जानी चाहिए। न्यायमूर्ति गोगोई ने रूस के सोची में शंघाई सहयोग संगठन के मुख्य न्यायाधीशों के एक सम्मेलन में कहा कि न्यायपालिका को संस्थान की स्वतंत्रता पर लोकलुभावन ताकतों का मुकाबला करने के लिए खुद को तैयार करना होगा और मजबूत करना होगा। किसी देश के सफर के कुछ चरणों में जब विधायी और कार्यकारी इकाइयां लोक लुभावनवाद के प्रभाव में संविधान के तहत अपने कर्त्तव्यों एवं लक्ष्यों से दूर हो जाती हैं तो न्यायपालिका को इन लोकलुभावन ताकतों के खिलाफ खड़े होना चाहिए और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए। कुछ आलोचकों के लिए यह स्थिति आलोचना का एक मौका दे सकती है कि चुने हुए प्रतिनिधियों के फैसले को कैसे न्यायाधीश पलट सकते हैं, जबकि वे जनता द्वारा निर्वाचित नहीं हैं।

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