लोकल कोई नहीं बैठेगा

हमीरपुर—हाल ही में बंजार में ओवरलोडिड बस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद प्राइवेट बस आपरेटरों ने लोकल सवारियां बिठाना बंद कर दी हैं। आलम यह है कि कंडक्टर सवारी को बस पर चढ़ने से पहले पूछ रहे हैं कि जाना कहां है। अगर सवारी पांच से दस किलोमीटर की है, तो उन्हें बसों में बैठने नहीं दिया जा रहा। हालात ऐसे हो गए हैं कि सवारियों को दो-दो घंटे बस अड्डों पर बैठना पड़ रहा है। सवारियों की मानें तो कंडक्टर कह रहे हैं कि हमें ओवरलोडिंग न करवाने के सख्त आर्डर हैं और यदि लोकल सवारियां बैठती हैं, तो उन्हें घाटा उठाना पड़ेगा। अगर कोई बस आपरेटर किसी कारणवश ओवरलोडिंग करता है, तो पुलिस उनके चालान काट रही है। ऐसे बस आपरेटरों को पांच से सात हजार रुपए तक का जुर्माना ठोंका जा रहा है। हालांकि यात्री बसों में न बिठाने पर बस आपरेटरों से भी उलझ रहे हैं। हमीरपुर बस स्टैंड में ऐसी दर्जनों सवारियां नजर आईं, जिनमें महिलाएं और स्टूडेंट्स भी शामिल थे, जो दो घंटे से बस न मिलने के कारण परेशान थे।

पैदल पेपर देने पहुंचे कालेज छात्र

सबसे ज्यादा दिक्कत उन छात्रों को झेलनी पड़ी, जिन्हें एमए के फाइनल एग्जाम देने जाना था। परीक्षा के लिए छात्रा दूरदराज क्षेत्रों से हमीरपुर बस अड्डा पहुंचे थे, लेकिन उन्हें यहां से हमीरपुर महाविद्यालय के लिए कोई भी बस सुविधा नहीं मिल रही थी। जितनी भी प्राइवेट बसें अड्डा से निकलीं, उनके आपरेटरों ने अणु व कालेज की सवारियां बिठाने से साफ मना कर दिया। इसके चलते अधिकतर छात्रों को पैदल ही कालेज तक पहुंचना पड़ा।

एडमिशन लेनेे जा रहे छात्र-अभिभावकों भी हुए परेशान

यही नहीं, कालेज में एडमिशन का सोमवार को आखिरी दिन था। इसके चलते छात्र भी एडमिशन लेने को अपने अभिभावकों सहित बस अड्डा पहुंचे हुए थे, उन्हें भी समय पर बसें नहीं मिल पाईं। ऐसे में अधिकतर छात्रों व उनके अभिभावकों को अणु तक पैदल या फिर डेढ़ से दो घंटे के इंतजार के बाद बसों में सीटें मिल रही थीं। हालांकि एचआरटीसी यात्रियों को सुविधा मुहैया करवाने में लगा हुआ है। निगम प्रबंधन ने एचआरटीसी बस चालकों को निर्देश दिए हैं कि जिन बसों में कालेज के छात्र हमीरपुर पहुंचते हैं, उन छात्रों को बसें हमीरपुर महाविद्यालय में ही उतारे, ताकि छात्रों को कालेज पहुंचने में किसी तरह की परेशानी न झेलनी पड़े। इसके अलावा दिनभर भी समय-समय पर निगम की आधा दर्जन से अधिक बसें अणु महाविद्यालय तक भेजी गईं।

सीटें फुल होते ही नॉन स्टाप दौड़ रही बसें

लांग रूट की बसों में भी कोई भी यात्री खड़ा नजर नहीं आ रहा था। बताया जा रहा है कि लांग रूट की बसों ने सीटें फुल होते ही बस को नॉन स्टाप कर दिया था। ऐसे में दर्जनों यात्री स्टेशनों पर ही खड़े रह गए । वह समय पर अपने कार्यालयों तक नहीं पहुंच पाए। इसका एक कारण यह भी है कि बसों में कोई भी यात्री खड़ा पाया गया, तो संबंधित बस आपरेटरों के चालान तक काटे जा रहे हैं।

चालान से बचने के लिए पीछे ही उतारी जा रही सवारियां

जिलाभर में चालान से बचने के लिए कई बस आपरेटरों ने शहर से पांच से छह किलोमीटर पीछे ही बस में खड़ी सवारियांे को उतारना शुरू कर दिया है। ऐसे में यात्रियों को वहां से पैदल या फिर टैक्सी के जरिए आगे तक का सफर तय करना पड़ रहा है।

टैक्सी से सफर करने को मजबूर हुए लोग

प्राइवेट बसों द्वारा लोकल सवारियां न बिठाने पर पक्काभरो, दोसड़का, बडू, नाल्टी बाइपास के लोगों को भी चार से पांच किलोमीटर का सफर पैदल या फिर टैक्सी के जरिए ही करना पड़ा। कोई भी बस आपरेटर लोकल यात्रियों को बिठाने को तैयार नहीं था।

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