विजिलेंस को भेजा बस अड्डों का केस

धर्मशाला, चिंतपूर्णी में आबंटन पर केस दर्ज करवाने की तैयारी में जयराम सरकार

शिमला – धर्मशाला और चिंतपूर्णी बस अड्डों के आबंटन का मामला स्टेट विजिलेंस एंड एंटी क्रप्शन ब्यूरो को भेजा गया है। विभागीय जांच और लीगल ओपीनियन के आधार पर जयराम सरकार ने इस मामले में विजिलेंस केस दर्ज करवाने का फैसला लिया है। इस आधार पर पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली तथा एचआरटीसी के तत्कालीन अफसरों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। विभागीय जांच में स्पष्ट हुआ है कि धर्मशाला में बस अड्डे के बिना निर्माण के ही पार्किंग फीस वसूली जा रही है। चिंतपूर्णी में नियमों की धज्जियां उड़ाकर 80 फीसदी तक कंस्ट्रक्शन में डेविएशन की गई है। इस आधार पर लीगल डिपार्टमेंट ने मामला विजिलेंस को भेजने की सिफारिश कर दी है। जाहिर है कि यह मुद्दा वीरभद्र सरकार के खिलाफ तैयार की गई भाजपा की चार्जशीट में प्रमुख रहा है। राज्य सरकार ने इस मामले में परिवहन विभाग के कमेंट्स मांगे थे। इस कारण एचआरटीसी प्रबंधन से इस मामले की गहन छानबीन करवाई गई है। इससे स्पष्ट हुआ है कि धर्मशाला में पीपीपी मोड पर आधारित बस अड्डे के निर्माण के लिए एग्रीमेंट ही गलत नियत से हस्ताक्षरित हुए था। यह दुनिया का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसके निर्माण से पहले ही फीस वसूली शुरू हो गई थी। इस कारण लीगल डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीर बताते हुए विजिलेंस जांच की राय दी है। विभागीय जांच में कहा गया है कि चिंतपूर्णी बस अड्डे के निर्माण के लिए संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी ने सारे नियमों को ताक पर रख दिया। नियमों के तहत किसी भी प्रोजेक्ट में 15 से 20 फीसदी की डेविएशन का प्रावधान है। इसके लिए बाकायदा राज्य सरकार से अनुमति लेना जरूरी रहता है। बावजूद इसके कंस्ट्रक्शन कंपनी ने बिना अनुमति लिए 80 फीसदी तक डेविएशन करके चिंतपूर्णी बस अड्डे का अपनी सुविधानुसार हुलिया ही बदल दिया। विभागीय जांच में कहा गया है कि कंस्ट्रक्शन कंपनी को लाभ देने के लिए चिंतपूर्णी में इस नियम की अवहेलना हुई है।

बढ़ सकती हैं जीएस बाली की मुश्किलें

वीरभद्र सरकार के कार्यकाल से जुड़े इन दोनों प्रोजेक्टों में पूर्व परिवहन मंत्री का भी कंस्ट्रक्शन कंपनियों को सहयोग का आरोप लगता रहा है। इस कारण मामला विजिलेंस के सुपुर्द होने के कारण तत्कालीन परिवहन मंत्री जीएस बाली की भी मुश्किलें बढ़ सकती है।

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