शतरंज से जुड़ेंगे चार हजार टीचर

अब प्राइमरी विंग के पाठ्यक्रम में शामिल होगी गेम, विभाग ने शुरू की प्रक्रिया

 मंडी—प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग ने प्रदेश में पाठ्यक्रम व स्कूली खेलों में शतरंज गेम को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए प्रारंभिक शिक्षा विभाग प्रदेश के करीब 4000 जेबीटी को गेम में जोड़ेगा। इसमें जेबीटी, एचटी, सीएचटी भी शामिल हैं। इस संबंध में विभाग  ने प्रदेश के समस्त उपनिदेशकों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में शतरंज की जानकारी व रुचि रखने वाले शिक्षकों की रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय को दस दिन के भीतर भेजनी होगी, ताकि सूचना समय पर समेकित की जा सके। विभाग ने कहा है कि शतरंज विषय को 12 वर्ष की आयु (कक्षा 1-5) तक शुरू करना व 12 वर्ष की आयु तक स्कूली खेलों में शामिल किया जाना प्रस्तावित है। इसके चलते विभाग ने प्रत्येक जिला के उपनिदेशकों को निदेशालय द्वारा जारी प्रपत्र के अनुसार सूचना उपलब्ध करवाने का कहा गया है। इसमें जिन जेबीटी को शतरंज की जानकारी के साथ उक्त गेम में रुचि रखते हैं, वे शिक्षक श्रेणीवार रिपोर्ट उपलब्ध करवाएं। प्रत्येक जिला से सूचना खंड स्तर पर 20-20 शिक्षकों के नाम सहित उपलब्ध करवानी होगी। इसमें प्रत्येक कलस्टर से दो-दो अध्यापकों के नाम भेजने होंगे। इसके अलावा यदि अध्यापक द्वारा किसी भी प्रकार पर शतरंज खेल में भाग लिया हो, तो उसका विवरण रेटिंग, नेशनल,  इंटर यूनिवर्सिटी, राज्य स्तरीय, जिला एवं खंड स्तर का रिपोर्ट में संलग्न करना होगा। बता दें कि शिक्षा विभाग गत वर्ष अंडर-19 वर्ग की स्कूली खेलों में शतरंत गेम को शामिल कर दिया है, जिसके चलते प्रदेश के हजारों बच्चों ने शतरंज गेम में भाग लिया था। अब विभाग प्राइमरी विंग की विषयवार में उक्त गेम को जोड़ने जा रहा है। प्रदेश में प्राइमरी विंग के 2000 कलस्टर हैं। विभाग प्रत्येक कलस्टर से दो-दो शिक्षक जोड़कर शतरंज गेम के साथ 4000 जेबीटी को जोड़ेगा। विभाग ने समस्त उपनिदेशकों से समस्त रिपोर्ट दस दिन के भीतर मांगी है। हितेश आजाद, संयुक्त निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने बताया कि शतरंज विषय को कक्षा पहली से पांचवीं तक शुरू करना व 12 वर्ष की आयु तक स्कूली खेलों में शामिल किया जाना प्रस्तावित है। पाठ्यक्रम व खेल गतिविधि के लिए शतरंज गेम में रुचि रखने वाले शिक्षकों को जोड़ा जाएगा। प्रत्येक जिला से शिक्षकों से संबंधित रिपोर्ट मांगी गई है।

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