शहर में चालान पर चालान

शिमला—पर्यटन नगरी शिमला में एक तरफ पर्यटक घूमने पहुंच रहे हैं तो दूसरी ओर पुलिस उनसे खूब कमाई कर रही है। पर्यटकों के साथ-साथ शिमला के लोगांे को भी पुलिस की चालान मुहिम का खामियाजा उठाना पड़ रहा है। न्यायालय के आदेशों  का हवाला देकर पुलिस हर किसी को दबका रही है और मौका मिलते ही बस चालान ठोंकने की मुहिम चल रही है। बाहर से आने वाले लोगों से मौके पर चालान का पैसा वसूल किया जा रहा है जिससे यहां घूमने आने वाले लोग बेहद परेशान हैं। वह यहां पर मौज मस्ती के लिए आए हैं लेकिन पुलिस उन्हें सिरदर्दी दे रही है। ऐसे में पर्यटन स्थली मंे पुलिस का आचरण लोगों को पसंद नहीं आ रहा। बताया जाता है कि इन दिनों जहां पर्यटन कारोबारियों की खूब चांदी है तो वहीं पुलिस भी चांदी कूट रही है। रोजाना चालान पर चालान करके अच्छी खासी रकम पुलिस के खाते मंे जा रही है। स्थानीय लोग ज्यादातर उसके कोप का भाजन बन रहे हैं क्योंकि शिमला के हरेक थाने को चालान का लक्ष्य रखा गया है। अपने निर्धारित टारगेट के हिसाब से पुलिस कर्मचारी चालान कर रहे हैं। जहां कभी चालान की संख्या पूरा दिन 40 से 50 रहती थी वहां इन दिनांे में 200-300 से ज्यादा चालान एक दिन मंे हो रहे हैं।  लोगों को केवल मोबाइल पर आने वाले मैसेज से पता चलता है कि उनकी गाड़ी का चालान हो चुका है।

रोजाना सड़कों पर घंटों तक ट्रैफिक जाम

एक तरफ शहर मंे रोजाना घंटों तक सड़कों पर ट्रैफिक जाम है तो दूसरी ओर पुलिस चालान में मस्त है। शहर की सड़कों पर सुबह से शाम तक ट्रैफिक जाम रहता है वह भी तब जबकि अत्यधिक संख्या में इन दिनों यहां पर ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी सड़कों पर दिख रहे हैं। यहां हर मोड़़ पर ट्रैफिक पुलिस  कर्मचारी देखे जा सकते हैं लेकिन जाम  उनके सामने भी वैसा ही दिखता है। इससे शिमला के लोगों की परेशानी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है और लोग अपने दफतरों को समय पर नहीं पहुंचते वहीं  बच्चे स्कूल समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं।

सुबह से ही सड़कों पर उतर रहे ट्रैफिक कर्मी

अपनी चालान मुहिम को सफल बनाने के लिए शिमला के ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी सुबह 7 बजे से ही सड़कों पर उतर आते हैं। लोगों में इस चालान मुहिम का इतना अधिक खौफ हो गया है कि  वह सड़क किनारे वाहन खड़ा करने से भय खा रहे हैं। शहर की पार्किंग टूरिस्ट के वाहनों से भर चुकी है जिसके बाद यहां के लोगों के पास वाहन खड़ा करने की जगह नहीं है। यलो लाइन में जो वाहन खड़ा है वो कई दिनों तक खड़ा रहता है जिसे परमानेंट पार्किंग बना दिया गया है। ऐसे में लोगों के पास कोई विकल्प नहीं है और वे पुलिस की मुहिम का शिकार हो रहे हैं।

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