शिमला को स्मार्ट सिटी बनने से रोक रहा एनजीटी

शिमला—केंद्र की मोदी सरकार ने देश के कई शहरों के साथ-साथ शिमला को भी स्मार्ट सिटी का तोहफा दे दिया था, लेकिन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल शिमला को स्मार्ट सिटी बनने से रोक रहा है। एनजीटी ने राजधानी शिमला में नगर निगम के दायरे में भवन निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए कई शर्तें लागू की हैं जिसका प्रभाव स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर पड़ रहा है। एनजीटी ने शिमला के कोर और ग्रीन एरिया में दो मंजिला और एक एटिक फ्लोर मकान से अधिक पर रोक लगा दी है। इसके साथ-साथ ग्रीन एरिया में विकास कार्य के लिए भी पेड़ नहीं कटेंगे। ऐसी स्थिति में शिमला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट अधर में लटक चुका है। हालांकि प्रदेश सरकार ने एनजीटी के आदेशों को चुनौति देते हुए सुप्रीम कोअर् में याचिका दायर कर चुकी है, जिस पर अगले महीने सुनवाई होनी है। उससे पहले शिमला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर कुछ भी काम नहीं हो सकते हैं। इस बात का पता तब चला जब मंगलवार को केंद्रीय आवास एवं शहरी मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सभी स्मार्ट सिटी मेनेजमेंट से वीडिया कांफ्रंेस के बाद प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव शहरी विकास प्रबोध सक्सेना ने यह जानकारी दी। सक्सेना ने कहा कि जब तक एनजीटी के ऑर्डर हैं, तब तक शिमला स्मार्ट सिटी प्रोजेकट पर काम नहीं हो सकता है। यहां सिर्फ वहीं कार्य हो सकते हैं जिस पर एनजीटी के ऑर्डर लागू नहीं होते। उन्होंने कहा कि शिमला स्मार्ट सिटी के तहत 53 प्रोजेक्ट्स पर काम होना है, लेकिन एनजीटी के आदेशाों के चलते मात्र छह पर ही काम हो सकते हैं। यानी 47 प्रोजेक्ट्स पर काम सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद ही हो सते हैं। उल्लेखनीय है कि शिमला को स्मार्ट सिटी का दर्जा नौ अगस्त 2017 को मिला था। उसके बाद पहली जनवरी 2018 को कंपनी एक्ट के तहत स्मार्ट सिटी का रजिस्ट्रेशन किया गया और 2905.97 करोड़ का बजट प्रस्तावित है। इसमें से अभी तक केंद्रं सरकार ने 58 करोड़ और राज्य सरकार ने 42 करोड की राशि जारी कर दी है। यानी कुल मिला कर सौ करोड़ की राशि स्मार्ट सिटी शिमला को मिल चुकी है, लेकिन काम जीरो है। प्रबोध सक्सेना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार ने मजबूति से पक्ष रखा है, लेकिन जब तक सुनवाई न हो तब तक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर काम करना संभव नहीं हैं।

कोर-ग्रीन एरियर में फिलहाल नहीं होगा विकास

शिमला स्मार्ट सिटी के तहत कोर एवं ग्रीन एरिया में भी विकास होना है, लेकिन इन क्षेत्रों में किसी भी सूरत पर काम नहीं हो सकते। इसे देखते हुए स्मार्ट सिटी शिमला में पहले चरण में वही कार्य होंगे जिस पर एनजीटी के आदेशों को कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऐसे में स्मार्ट पार्किंग, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट, स्मार्ट मॉबिलिटी सहित छह प्रोजेक्ट पर काम होगा।

पीएमसी के लिए आए आठ आवेदन

स्मार्ट सिटी शिमला को काम शुरू करने के लिए पीएमसी यानी प्रोजेक्ट मेनेजमेंट कंसल्टेंट के लिए कुल आठ आवेदन आए हैं। जिसमें से चार का नाम सेलेक्ट कर दिया गया है। ये सभी निजी कंपनियां हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक फाइनल एक पीएमसी का चयन के लिए जल्द ही मुख्य सचिव बीके अग्रवाल की अध्यक्षता में बीओडी की बैठक होगी उसमें कंपनी का चयन होना है।

You might also like