शिमला में सांस लेना हुआ मुश्किल

ओल्ड बस स्टैंड में वायु प्रदूषण का स्तर पहुंचा 62.2, टीबी-दमे जैसी बीमारियों का खतरा

शिमला -राजधानी शिमला के  ओल्ड बस स्टैंड की वायु प्रदूषण का स्तर मई माह में 62.2 तक पहुंच गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हर माह लिये जाने वाले सैंपल में यह खुलासा हुआ है। शिमला के पुराने बस स्टैंड में वाहनों की संख्या ज्यादा होने की वजह से यहां पर वायु दिन-प्र्रतिदिन प्रदूषित होती जा रही है। इससे बस स्टैंड मेंे लोगांे के स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिली जानकारी के मुताबिक मई 2018 में ओल्ड बस स्टैंड की वायु का स्तर 108.6 था, वहीं, जून 2018 में 125 इसके बाद अगस्त में यह कम होकर 48.6 और सितंबर में 61.8 व अक्तूबर में 90, नवंबर में 58.4, दिसंबर 2018 तक 70 तक पुराने बस स्टैंड में वायु का स्तर जांचा गया है। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी में 67.4 व फरवरी में 60.7, मार्च में 51. 2 और अप्रैल में 64.7 और मई 2019 में 62.6 तक वायु के प्रदूषण का स्तर पहंुचा है। बता दें कि पिछले अपै्रल माह को देखंे तो मई में दो लेवल तक वायु प्रदूषण के स्तर में सुधार हुआ है। वहीं, अगर पिछले आंकड़ों की बात की जाए तो कभी एक माह में स्तर नीचे उतरता है तो कभी उपर। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस रिपोर्ट से यह साफ है कि शिमला की सबसे महत्वपूर्ण जगह ओल्ड बस स्टैंड लोंगों के स्वास्थ्य को लेकर खतरे से खाली नहीं है। जिस तरह ओल्ड बस स्टैंड में वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ता ही जा रहा है, उससे साफ है कि दमा के मरीजों को इस जगह पर खड़े रहकर सांस लेना किसी खतरे से कम नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी चिंता जाहिर करते हुए वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को लेकर चिंता जाहिर की है। वहीं, कहा है कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में लोगों का शिमला के इस महत्वपूर्ण जगह पर खड़े रहना भी किसी परेशानी से कम नहीं होगा। विशेषज्ञों की मानें तो इस प्रदूषित हवा की वजह से लोगोंे में टीवी व दमे जैसी बीमारी भी फैल सकती है। खास बात यह है कि  शिमला के टका बैंच की वायु प्रदूषण का स्तर 2019 में सुधार हुआ है। बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक शिमला के मशहूर टका बैंच की वायु बिल्कुल साफ है। हालांकि 2014-2015 में टका बैंच की वायु का स्तर 46.1 और 2015-2016 में 41.2 और 2017-2018 से लेकर 2019 तक वायु प्रदूषण का स्तर जीरो तक पहंुच गया है। बता दें कि बुधवार को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर शिमला के पीटरहाफ में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण बचाव को लेकर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। प्रदर्शनी के माध्यम से पर्यावरण बचाव को लेकर हमें क्या कदम उठाने चाहिएं, इस पर कई बडे़ प्रोजेक्ट तैयार किए गए थे।

 

 

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