संगड़ाह के स्वास्थ्य संस्थान बंद होने की कगार पर

संगड़ाह—संगड़ाह अस्पताल में चिकित्सकों के चार में से तीन पद खाली होने, यहां पिछले दो साल से एक्स-रे तक न होने तथा बिस्तरों की संख्या एक तिहाई कम किए जाने से मरीजों को आए दिन परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्वयंसेवी संगठन संगड़ाह विकास मंच, सारा, व्यापार मंडल व जनवादी महिला समिति आदि ने क्षेत्र में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की और लंबे अरसे से ध्यान न देने के लिए संबंधित विभाग व सरकार के प्रति नाराजगी जताई। इन संगठनों ने क्षेत्र में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं तथा 50 फीसदी से ज्यादा हैल्थ सब सेंटर बिना स्टाफ  बंद होने को क्षेत्रवासियों की सेहत से खिलवाड़ बताया। बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर छह अप्रैल व 18 फरवरी को संगड़ाह में विरोध प्रदर्शन कर चुकी जनवादी महिला समिति की प्रदेश अध्यक्ष संतोष कपूर ने कहा कि, क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार न होने की सूरत में निकट भविष्य में फिर से प्रदर्शन किया जाएगा। नियमानुसार हालांकि किसी सरकारी कर्मचारी से आठ घंटे से ज्यादा लगातार ड्यूटी नहीं ली जा सकती, मगर सीएचसी संगड़ाह में पिछले वर्ष से कार्यरत एक मात्र डाक्टर अथवा यहां प्रतिनियुक्ति किए जाने वाले एक अन्य चिकित्सक को लगातार 24 घंटे काम करना पड़ रहा है। चार दिन लगातार ड्युटी के बाद डाक्टर को अगले तीन दिन आराम करने के लिए छुट्टी मिलती है। बीएमओ संगड़ाह द्वारा की गई इस व्यवस्था से विभाग के अनुसार स्थानीय एमबीबीएस डाक्टरों को कोई आपत्ति नहीं है। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दिनों यहां कार्यरत एक मात्र डा. आकांक्षा शर्मा के अलावा कुछ समय के लिए आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों से एक अन्य चिकित्सक को प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है। खंड स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार हाल ही में पीएचसी चाढ़ना से डाक्टर प्रतिनियुक्त किए जाने पर स्थानीय पंचायत प्रधान आपत्ति जता चुके हैं तथा आगामी 10 जून को होने वाली प्रशासनिक बैठक में भी वह इस मामले को रखेंगे। क्षेत्र में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के चलते 41 पंचायतों की सेहत रामभरोसे है तथा झोलाछाप डाक्टरों का कारोबार भी दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है। उपमंडल संगड़ाह की सड़कों पर पिछले साढ़े छह वर्षों में वाहन हादसों में 123 लोगों की जान जाने तथा क्षेत्र में मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव को लेकर हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र रहे इस हलके के प्रमुख भाजपा नेता व कांग्रेस विधायक दोनो खामोश हंै। हर बार चुनाव के दौरान हालांकि नेताओं द्वारा यहां स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार व सीएचसी संगड़ाह को रैफरल अस्पताल का दर्जा दिए जाने के वादे किए जाते हैं, मगर बाद में सब भूल जाते हैं।

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