सब्ज वाली फक्की

Jun 12th, 2019 12:05 am

अशोक गौतम

साहित्यकार

कइयों को भ्रम एवं उच्च कोटि के आदर्शों की ताड़ से भी कई गुना लंबी डींगें मारना टॉनिक का काम करता है। उन्हें भी करता है। तभी तो अपनी तारीफों के बिन सरिया, सीमेंट, बजरी के दुनिया के सबसे लंबे पुल बनाते-बनाते अंत में खुद ही उस पर से धड़ाम उल्लू बनने के बाद उनके चेहरे की दमक देखने लायक होती है। उनकी पीठ तो कई बार लगती है, पर वह जांबाज फिर भी किसी को अपनी पीठ दिखाते नहीं। हर किसी को उल्लू बनाते-बनाते खुद उल्लू बनने वालों की यही एक सबसे बड़ी दिक्कत होती है कि वह जब भी किसी का उल्लू बनाने निकलते और जब खुद ही उल्लू बन जाएं, तब भी उन्हें अपने उल्लूपन का कतई एहसास नहीं होता। लोग बाग होते हैं कि अपने ही हाथों अपने को उल्लू बनते पेट ही पेट हंसते मजे लेते हैं। वह वैसे तो मेरे खास हैं, पर वह मुझे भी नहीं बख्शते। उनका दांव लगे, तो भगवान तक का उल्लू बनाने की पूरी कोशिश करते-करते खुद उल्लू हो लें। मत पूछो औरों को उल्लू बनाते-बनाते उन्हें खुद उल्लू बनने में कितना आनंद मिलता है। उनका ज्यों ही दांव लगता है, वह सादर मुझे भी उल्लू बनाते-बनाते खुद उल्लू हो लेते हैं। दूसरी ओर उनसे प्रेम करने के चलते मैं भी उनका मन रखने के लिए सहज भाव से उनके सामने उनके द्वारा उल्लू बनने का पूरा स्वांग कर लेता हूं कि कहीं मित्र का दिल टूट न जाए। मैं नहीं चाहता कि मैं कम से कम उल्लू बनने के हाल में मित्र का मन दुखाऊं। महज इसीलिए उनके सामने, उनके द्वारा,  उनके लिए उल्लू बनने का सफल अभिनय कर लेता हूं। जब उन्हें लगता है कि वह काठ की हांडी अबकी बार फिर चढ़ा गए, तो मत पूछो उन्हें कितनी खुशी मिलती है। कइयों को कई बार अपनी काठ की हांडी कोयला हुई दिखती ही नहीं। इल्यूजन में जीने का भी अपना ही एक अलग मजा होता है साहब। वह कल फिर आए। आदतन बड़ी-बड़ी मारने लगे। समझ गया था, सीएम-पीएम से कम तो आज भी क्या ही मारेंगे। असल में उनकी आत्मा उनके शरीर में नहीं, आईएएस, मंत्रियों के शरीरों में निवास करती है। जब तक वह किसी मंत्री का जिक्र अप्रसंगवश नहीं कर लेते, उनको रोटी ही नहीं पचती। मंत्रियों, अफसरों का जिक्र उनको रोटी पचाने में शाही हाकिम की शर्तिया सब्ज दिखाने वाली फक्की का काम करता है। आज मन उल्लू बनने का नाटक करने को भी कतई तैयार न था, पर वह उल्लू बनाने को थ्री पीस पहनकर आए थे। इससे पहले कि वह मुझे उल्लू बनाने की अपनी ओर से सफल कोशिश करते, मैंने पूछ ही लिया ‘मित्र! एक बात तो बताओ?’ मेरे पूछते ही वह अचकचाए। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि कोई उनसे पूछ भी सकता है। तब वह हिम्मत कर बड़ी ही शालीनता से अपना उल्लू अपनी जेब में छिपाते बोले – पूछो! पर अभी बस सीएम साहब के पीए का फोन आया था कि आकर जरा…। ‘मुबारक हो, जानता हूं पीएम साहब तुम्हारे बिना शौच भी नहीं जाते, पर बात यह है कि तुम सबको उल्लू समझते भी हो कि बनाते ही हो?’ वह चुप! लगा, उन्हें ज्यों अजगर सूंघ गया हो, पर बाद में पता चला कि वह अजगर को सूंघ गए थे। सो दिल चीर कर हंसते बोले – भाई साहब! कमाल है आप भी। कल दिल्ली जा रहा हूं। पीएमओ आफिस से फोन आया था कि आकर मिलता हूं… कह वह चले गए। हे मेरे भगवान! मुझे माफ करना। मैंने उल्लू बनाते-बनाते खुद उल्लू बनने वाले अपने खास दोस्त का पहली और आखिरी बार मन दुखाया है।

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या कर्फ्यू में ताजा छूट से हिमाचल पटरी पर लौट आएगा?

View Results

Loading ... Loading ...


Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV Divya Himachal Miss Himachal Himachal Ki Awaz