समाज में अच्छा बदलाव हो

 प्रेमचंद माहिल, हमीरपुर

विद्वान व्यक्ति तर्कवान, सच्चाई पसंद, कर्त्तव्य परायण और निष्ठावान होता है, जबकि समाज लगभग चापलूसों, धोखेबाजों, अवसरवादियों, कामचोरों और भ्रष्टाचारियों से भरा पड़ा है। चाहे वह किसी भी वर्ग में हो, लोगों, समाज, देश के प्रति अपने कर्त्तव्य का पालन करता है और आशा रखता है कि समाज के अन्य लोग भी उसका अस्तित्व समझें, परंतु जब ऐसा नहीं होता है, तो सबसे ज्यादा पीड़ा का आभास होता है। राजनीति को ही लें, तो इसमें चापलूसों, मक्कारों की चांदी है। झूठ बोलने और झूठे वादे करने वालों को सम्मान दिया जाता है। ऐसे में बुद्धिमान का जीवन सुखमय है या दुखमय? भविष्य में ऐसा समय आए कि झूठ, फरेब, चापलूसी, धोखेबाजी, बेईमानी, भ्रष्टाचार को दरकिनार कर हर व्यक्ति विद्वान बन जाए।

 

 

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