सवा 20 लाख में बिके झूले

सोलन—राज्य स्तरीय मां शूलिनी मेले में लगने वाले झूलों में इस वर्ष नगर परिषद सोलन को करीब 25 प्रतिशत अधिक आय हुई है। इस वर्ष झूलों का ठेका 20 लाख 25 हजार रुपए पर छूटा है, जबकि गत वर्ष यह ठेका 14 लाख 50 हजार रुपए में दिया गया था। शनिवार को नगर परिषद कार्यालय में आयोजित इस खुली बोली में पांच बोलीदाताओं ने भाग लिया, जिसमें महेश ने सबसे अधिक बोली लगाकर ठेका अपने नाम किया। बता दें कि नगर परिषद द्वारा हर वर्ष झूलों के लिए नीलामी का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी नप द्वारा ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया को अपनाया गया था लेकिन इसमें केवल दो बोलीदाताओं ने ही टेंडर भरे थे। इसको देखते हुए नप अधिकारियों ने खुली बोली आयोजित करने का निर्णय लिया था। शनिवार को नप सोलन के कार्यालय में खुली बोली का आयोजन नप अध्यक्ष देवेंद्र ठाकुर की अध्यक्षता में किया गया। इस अवसर पर नप कार्यकारी अधिकारी व तहसीलदार सोलन गुरमीत नेगी सहित अन्य नप कर्मचारी मौजूद रहे। सर्वप्रथम नप अध्यक्ष ने सभी बोली दाताओं को नियम व शर्तों से अवगत कराया। बोली 14 लाख 50 हजार रुपए से आरंभ की गई। इस दौरान सभी बोलीदाताओं ने अपनी ओर से बोली लगानी आरंभ की और देखते ही देखते बोली 20 लाख तक पहुंच गई। अंत में महेश ने 20 लाख 25 हजार रुपए (जीएसटी अतिरिक्त) की बोली लगाई और इसके किसी अन्य बोलीदाता ने बोली नहीं बढ़ाई और ठेका महेश को दिया गया। पिछले वर्ष के मुकाबले मिली 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी से नप अधिकारियों की भी बांछे खिल गई हैं।

दो लोगों की खींचतान से नप हुई मालामाल

बोली के दौरान हालांकि पांचों बोलीदाता बोली लगा रहे थे, लेकिन दो बोलीदाताओं के बीच चली खींचातानी का सीधा फायदा नगर परिषद का हुआ है। बोली के दौरान महेश व रोहित चौहान के बीच एकदूसरे से ज्यादा बोली लगाने की होड़ लगी थी। कभी एक तो कभी दूसरा ज्यादा बोली लगा रहा था, हालांकि जब बोली 20 लाख 25 हजार तक पहुंची तो रोहित ने बोली न लगाने का फैसला लिया। इसके बाद महेश को ठेका दिया गया। 

30 व 50 रुपए होगा टिकट

नगर परिषद ने झूलों के टिकट के रेट भी निर्धारित कर दिए हैं।  इस वर्ष टिकट के रेट 30 रुपए व 50 रुपए होंगे। गत वर्ष यह रेट 25 व 45 रुपए थे। ठेकेदार को इन रेटों की लिस्ट को झूलों के बाहर प्रदर्शित करने के भी निर्देश दिए गए हैं और ज्यादा रेट न वसूलने की भी सख्त हिदायत दी गई है। यदि ठेेकेदार ज्यादा रेट वसूलते हुए पाया जाता है तो उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा और प्रतिदिन के हिसाब से एक लाख रुपए जुर्माना भी वसूला जाएगा।

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