साहित्य में पर्यावरण को खंगालेंगी अपूर्वा

मंडी—पर्यावरण से जुड़ी हिमाचली कथाकारों की कहानियों पर चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में अंग्रेजी विभाग की सहायक प्रोफेसर अपूर्वा शर्मा शोध कर रही है। अपूर्वा वर्तमान में धर्मशाला स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय में पीएचडी शोधार्थी हैं। जो अपने शोध कार्य के सिलसिले में ऐतिहासिक नगरी पांगणा पहुंची। बहुंमुखी प्रतिभा की धनी नवोदित लेखिका, कवयित्री और अनुवादक अपूर्वा शर्मा ने हिमाचली कहानियों में पर्यावरण चेतना, जिसका सीधा और स्पष्ट संबंध लोक से हैं तथा जो सरलता, निश्चलता, स्पष्टता, प्रेम-सदव्यवहार आदि मानवीय सांस्कृतिक-सामाजिक दृष्टिकोण से जीवन का आधार तत्व है, को लेकर अध्ययन किया है। अपूर्वा शर्मा द्वारा मंडी के चर्चित कथाकार मुरारी शर्मा की बाणमूठ कहानी संग्रह में पर्यावरण पर आधारित कहानी मुट्ठी भर धूल और प्रेतछाया को अपने शोध का विषय बनाया है। वहीं पर  देवकन्या ठाकुर की जोगणी कहानी, वरिष्ठ साहित्यकार सुदर्शन वशिष्ठ की कहानी बाघ कहानी को भी अपने शोध कार्य में शामिल किया है। अपूर्वा शर्मा ने बताया कि उन्होंने हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों की पर्यावरण जागरण की कहानियों की खोज का भी लक्ष्य रखा है तथा इसी सिलसिले में पांगणा के बाद किन्नौर जा रही है। इस अवसर पर संस्कृति मर्मज्ञ डाक्टर जगदीश शर्मा ने अपूर्वा शर्मा को 1927 में प्रकाशित सुकेत गजेटियर की फोटोकॉपी भी भेंट की। वहीं सुकेत संस्कृति साहित्य एवं जन कल्याण मंच पांगणा के अध्यक्ष डाक्टर हिमेंद्र बाली हिम द्वारा लिखित सिमटता आसमान कहानी संग्रह की एक प्रति अपूर्वा शर्मा को शोद्धार्थ भेंट की। डाक्टर जगदीश शर्मा का कहना है कि ग्रामीण जीवन और प्रकृति की समरसता तथा सौंदर्य के प्रति अपूर्वा का यह प्रयास स्तुत्य है।

You might also like