सुलह से भी सुलझ सकते हैं विवाद

कुल्लू—हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश चंद्र भूषण बारोवालिया ने कहा कि मध्यस्थता विवाद समाधान का एक प्रभावी माध्यम है और इससे समाज मंे शांति भी स्थापित होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जनजातीय जिलों में आज भी यह प्रणाली ग्रामीण स्तर पर व्यवहार में हैं और लोग आपस में ही झगड़ों के निपटारे पर विश्वास करते हैं। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता और सुलह में आंशिक अंतर है। मध्यस्थता स्वैच्छिक है, जहां दोनों पक्षकारों की सहमति जरूरी है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में वैकल्पिक व्यवस्था पर नए विचार उभर कर आएंगे, जिससे मध्यस्थकारों को लाभ पहुंचेगा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण पुरेंद्र वैद्य ने स्वागत भाषण में कहा कि न्यायालयों में बड़ी संख्या में मुकद्मों की भरमार के चलते विवादों के समाधान की वैकल्पिक व्यवस्था आज की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों से मामलों का बोझ कम करने के उद्देश्य से ही मध्यस्थताएं लोक अदालतों जैसी वैकल्पिक व्यवस्था को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्यस्थता का मकसद पक्षकारों को आपसी सहमति से सौहार्दपूर्ण ढंग से विवाद को सुलझाना है। मध्यस्थकार की भूमिका पक्षकारों को माहौल प्रदान कर उनके विवाद को सुलझाना है। उन्होंने कहा कि कुल्लू में आयोजित इस सम्मेलन से सभी प्रतिभागी लाभान्वित होंगे और उन्हें इस प्रक्रिया को और अधिक व्यवहारिक बनाने में मदद मिलेगी। राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रेम पाल रांटा ने मुख्यातिथि, अन्य गणमान्य अतिथियों, वक्ताओं और सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण के प्रशासनिक अधिकारी गौरव महाजन,   हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल वीरेंद्र सिंह, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की धर्मपत्नी प्रोमिला चौधरी, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के सहायक महाधिवक्ता सत्येन वैद्य, उपायुक्त यूनुस, न्यायिक अधिकारी व बार एसोसिएशन कुल्लू मनाली व बंजार के पदाधिकारी भी सम्मेलन में मौजूद रहे।

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