सेब के लिए खाद नहीं, जीवामृत बेस्ट

पालमपुर – सेब बागबान भी धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं और उन्हें प्रोत्साहजनक परिणाम मिल रहे हैं। प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में जीरो बजट प्राकृतिक खेती पर आयोजित किए जा रहे प्रशिक्षण शिविर के दौरान जीत सिंह चौहान ने अपने खेतों में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की विधि द्वारा की जा रही सेब की फसल के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। जीवामृत के प्रयोग से सेब के पौधों को किसी भी खाद या कीटनाशक दवाई की आवश्यकता नहीं पड़ती। पद्मश्री सुभाष पालेकर ने किसानों को बताया कि पौधे की जड़ों का खाद्य खाद नहीं, बल्कि भूमि में उपलब्ध अनंत करोड़ सूक्ष्म जीवाणु ही पौधे को भोजन उपलब्ध करवाते हैं, इसलिए भूमि में जीवाणुओं की संख्या बढ़ाकर पौधों को भोजन उपलब्ध करवाया जा सकता है। भूमि से पौधों को भोजन उपलब्ध करवाने के लिए वांछित जीवाणु केवल देशी गाय के गोबर में उपलब्ध होते हैं, जो कि भैंस या जर्सी गाय के गोबर में नहीं होते। भूमि में पौधे के लिए वांछित सभी पोषक तत्त्व उपलब्ध रहते हैं और भूमि में पोषक तत्त्वों को उपलब्ध करवाने वाले जीवाणुओं की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है, जिसके लिए भूमि में जीवामृत डालना चाहिए। प्राकृतिक खेती की इस विधि में खेतों में गोबर खाद के रूप में नहीं डाली जाती, बल्कि जामन के रूप में प्रयोग की जाती है, क्योंकि इस विधि में एक एकड़ में देशी गाय का केवल दस किलो गोबर का घोल ही डाला जाता है। जीवामृत को सीधा भूमि में डालने से बहुत बेहतर परिणाम मिले हैं। जीवामृत को खेतों में सिंचाई के पानी के साथ मिलाकर दो पौधों के बीच में सतह पर डालकर या खड़ी फसल पर छिड़काव करके प्रयोग किया जा सकता है।

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