सोलन में 110 रुपए किलो बिक रहा लहसुन

सोलन फल एवं सब्जी मंडी में लहसुन की छंटाई का दौर

सोलन  – लहसुन की ‘सफेदी’ से किसानों के चहरे ‘लाल’ हो गए हैं। इस सीजन लहसुन ने ऐसी रफ्तार पकड़ी है कि किसानों के चेहरों की चमक बढ़ती जा रही है। जानकारी के अनुसार लहसुन की कीमत सैकड़ा लगा चुकी है। बुधवार को सोलन स्थित फल एवं सब्जी मंडी में 110 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से लहसुन बिका। मंडी में अब तक करीब 12 हजार क्ंिवटल तक लहसुन पहुंच चुका है। खासतौर पर सोलन के कुछ क्षेत्रों के अलावा, सिरमौर, शिमला, मंडी एवं कुल्लू जिला के किसान लहसुन लेकर सोलन पहुंच रहे हैं। कहा जा रहा है कि इस दफा दाम कम होने की संभावना नहीं है और आगामी दिनों में इसमें और अधिक उछाल देखा जा सकता है। गौर रहे कि सीजन के शुरुआती दिनों में 35 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से लहसुन बिका। तब से अब तक लहसुन की कीमतों ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। इस कारण किसान भी मालामाल हो गए। दूसरी ओर यह भी तर्क दिया जा रहा है कि इस बार चीनी लहसुन को भारत में घुसने नहीं दिया जा रहा, जिसका परोक्ष रुप से फायदा प्रदेश के किसानों को मिल रहा है। यही नहीं इस बार जरूरत से अधिक बारिश होने के चलते भी लहसुन का साइज काफी बढ़ा हैं, जिससे व्यापारियों सहित  आम लोग ज्यादा पसंद कर रहे है।  कृषि उपज एवं मंडी समिति, सोलन के सचिव प्रकाश कश्यप ने कहा कि लहसुन की कीमतों में लगातार उछाल जारी है। मंडी में अब तक करीब 12 हजार क्विंटल लहसुन विभिन्न जिलों से पहुंच चुका है। बुधवार को भी 100 से 110 रुपए प्रतिकिलो तक लहसुन के भाव किसानों को मिले। दिक्कत यह है कि कुछ किसान बिचौलियों के शिकार बन रहे हैं। लेकिन मंडी समिति ने ऐसे बिचौलियों पर कार्रवाई कर अढ़ाई लाख रुपए का जुर्माना भी वसूला है और भविष्य में जो भी बिचौलिया व्यापार करते हुए पकड़ा जाता है। उससे खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।  

किसानों को लूट रहे बिचौलिए 

यह भी सच है कि आधे से अधिक किसान मंडी तक नहीं पहुंच रहे। इन्हें बिचौलियों द्वारा ही बीच रास्ते में ही लूटा जा रहा है। हालांकि कृषि उपज एवं मंडी समिति द्वारा नाके लगाकर कार्रवाई की जा रही है। बावजूद इसके बिचौलिए अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे। जानकारी के अनुसार कृषि उपज एवं मंडी समिति की टीमें अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर अभी तक करीब अढ़ाई लाख रुपए जुर्माना वसूल चुकी है।

इस बार नहीं होगा निर्यात

पूरे देश से आ रही लहसुन की डिमांड को देखते हुए इस दफा शायद ही लहसुन का निर्यात हो। बताया जा रहा है कि जिस हिसाब से बाहरी राज्यों से डिमांड पहुंच रही है। उससे लगता है कि लहुसन के निर्यात का सपना अबकी बार अधूरा रह सकता है। उल्लेखनीय है कि बीते दो सालों में हिमाचली लहसुन की महक विदेशों तक पहुंची थी, जिस कारण सितंबर तक लहसुन का निर्यात होता रहा।

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