स्टूडेंट्स को बिना लैब टेस्टिंग ही बांट दी वर्दी

शिमला – बिना लैब टेस्टिंग के दो जगहों के स्कूलों में स्कूली वर्दी के आबंटन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, वहीं चंबा जिला में कंपनी द्वारा दिया गया सैंपल मिसमैच हो चुका है। नियमों के तहत जब तक वर्दी की लैब टेस्टिंग नहीं हो जाती, तब तक इसका आबंटन स्कूलों को नहीं किया जा सकता। बावजूद इसके प्रदेश के रामपुर व किन्नौर में वर्दी बांटने का काम शुरू हो गया है, जिसमें लैब टेस्टिंग रिपोर्ट का इंतजार नहीं किया गया। इस मामले में प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलबी की है और उनसे पूछा गया है कि आखिर नियमों को पूरा क्यों नहीं किया गया। चंबा जिला में वर्दी का सैंपल ही मिस मैच हो गया है। यानी लैब की जो टेस्ट रिपोर्ट आई है, उसमें टेंडर के समय दिया गया कपड़ा और वर्दी के कपड़े में भिन्नता है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक रोहित जम्वाल ने शिक्षा उपनिदेशक किन्नौर और रामपुर के ब्लॉक एलिमेंटरी आफिसर से जवाब तलब किया है। इसमें पूछा गया है कि बिना सैंपल रिपोर्ट आने के उन्होंने कैसे वर्दी का आबंटन कर दिया, जबकि विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिए थे कि जब तक सैंपल की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक वर्दियों का आबंटन न किया जाए। इस मामले में अब अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। गौर हो कि सभी जिलों में 125 बीपीईओ दफ्तरों और 125 सीनियर सेकेंडरी स्कूल प्रिंसीपल को वर्दी के आबंटन के लिए इंडेंटिंग अफसर बनाया है।

सिलाई के पैसे भी

अटल वर्दी योजना के तहत सरकार पहली से 12वीं कक्षा के छात्रों को फ्री वर्दी देती है। अब प्रदेश सरकार पहली से 10वीं कक्षा तक छात्रों को वर्दी की सिलाई का पैसा भी देगी। प्रति स्टूडेंट 200 रुपए दिए जाएंगे। 11वीं और 12वीं के बच्चों को वर्दी खुद सिलवानी होगी। दो साल के लिए करीब 174 करोड़ की खरीद हुई है।

ये रहा है विवाद

अटल स्कूल वर्दी योजना के तहत प्रदेश के 8.50 लाख छात्रों को पिछले साल स्मार्ट यूनिफॉर्म मिलनी थी। वर्दी खरीद की प्रक्रिया पिछले डेढ़ सालों से विवादों में है। शिक्षा विभाग ने सिविल सप्लाई निगम को इसकी खरीद का जिम्मा सौंपा था। विवाद के बाद सरकार ने टेंडर रद्द कर नए सिरे से टेंडर किया। अब रिपोर्ट आने से पहले ही इसका आबंटन किया गया है।

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