स्मार्ट बनने से पहले ही विवादों में शहर

धर्मशाला में पीएमसी मसले पर सरकार ने सीईओ से मांगा जवाब, शिमला में एनजीटी के शर्तें भारी

शिमला —केंद ने प्रदेश को दो स्मार्ट सिटी का तोहफा तो दिया है, लेकिन धर्मशाला विवादों में तो शिमला पर एनजीटी का डंडा चल पड़ा है। हालांकि धर्मशाला स्मार्ट सिटी का कार्य चल रहा है, लेकिन यहां कार्य कर रही निजी कंपनी पीएमसी यानी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के खिलाफ नगर निगम के महापौर ने ही मोर्चा खोल दिया है। मेयर ने निजी कंपनी पर काम में गुणवत्ता से समझौता करने एवं गलत काम करने का आरोप लगाया है। यहां तक कि इस संदर्भ में उन्होंने प्रदेश सरकार को भी चिट्ठी लिख कर कार्रवाई की मांग की है। इसके मद्देनजर प्रदेश सरकार ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट सीईओ से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। शिमला में पत्रकारों से रू-ब-रू प्रधान सचिव प्रबोध सक्सेना ने कहा कि धर्मशाला में काम सुचारू रूप से चला हुआ है। जहां तक पीएमसी को लेकर विवाद चला है, इस संदर्भ में सीईओ से जवाब मांगा गया है। उसके बाद प्रदेश इस मसले की समीक्षा करेगी और आगामी कार्रवाई करेगी।  उन्होंने कहा कि केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को देश के सभी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर वीडियो कान्फें्रसिंग के माध्यम से समीक्षा की है। केंद्र सरकार द्वारा लय लक्ष्य के मुताबिक धर्मशाला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का काम 2022 तक पूरा होना है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी धर्मशाला में 2109.69 करोड़ की लागत से 74 प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। अभी तक केंद्र सरकार ने 196 करोड़ और प्रदेश सरकार ने 26.89 करोड़ की राशि जारी कर दी है।   दूसरी तरफ स्मार्ट सिटी शिमला पर एनजीटी का डंडा पहले से ही चल पड़ा है, जिस कारण यहां 53 में मात्र छह प्रोजेक्ट्स पर ही काम हो सकता है। एनजीटी ने शिमला नगर निगम के दायरे में भवन निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए कई शर्तें लागू की हैं, जिसका प्रभाव स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर पड़ रहा है।

ग्यारह सौ मकान ही बने

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में अभी तक 11 सौ मकान ही बन पाए हैं। प्रदेश के 7912 गरीब परिवारों को मकान मिलना है। प्रधान सचिव ने कहा कि 2022 तक सभी 7914 पात्र गरीब परिवारों को यह आवास बांट दिए जाएंगे। 

केंद्र से 90 करोड़ और मांगे

अमु्रत मिशन के तहत प्रदेश सरकार ने केंद्र से 90 करोड़ की अतिरिक्त राशि की मांग की हे। प्रधान सचिव प्रबोध सक्सेना ने कहा कि नगर निगम शिमला और नगर परिषद कुल्लू को इस मिशन के तहत शमिल किया गया है। दोनों शहरों के लिए 304.52 करोड़ का बजट है।

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